Food Processing Sector: 2030 तक $600 अरब का लक्ष्य!

AGRICULTURE
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Food Processing Sector: 2030 तक $600 अरब का लक्ष्य!

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान देश के खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) क्षेत्र को बड़ा बूस्ट देने की तैयारी में हैं। उनका लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के लिए एग्रीकल्चर आउटपुट को वैल्यू-एडेड फूड प्रोसेसिंग में बदलना है। फिलहाल, भारत अपनी कुल खाद्य उपज का केवल **12-13%** ही प्रोसेस करता है, जो इस इंडस्ट्री में भारी ग्रोथ की संभावना दिखाता है। इस रणनीति से फसल की बर्बादी कम होगी, एक्सपोर्ट बढ़ेगा और छोटे उद्यमों को भी सहारा मिलेगा।

Detailed Coverage

फूड प्रोसेसिंग मार्केट को कैसे मिलेगी रफ़्तार?

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, चिराग पासवान ने भारतीय खाद्य क्षेत्र के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार किया है। वे खेती से सीधे वैल्यू-एडेड फूड प्रोसेसिंग की ओर बढ़ने की वकालत कर रहे हैं। एक कार्यक्रम में बोलते हुए, मंत्री ने मौसमी कृषि उपज को साल भर चलने वाले उपभोक्ता उत्पादों में बदलकर आर्थिक क्षमता को उजागर किया। इस बदलाव का मकसद एग्री सप्लाई चेन को मॉडर्न बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की लाभप्रदता में सुधार करना है।

FICCI और Deloitte की एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय फूड प्रोसेसिंग मार्केट 2030 तक $600 अरब के आँकड़े को छू सकता है। इस ग्रोथ के लिए टेक्नोलॉजी को अपनाने और निवेश में भारी बढ़ोतरी की ज़रूरत होगी। जैसा कि बताया गया, भारत अपनी कुल खाद्य उत्पादन का केवल 12-13% ही प्रोसेस करता है। यह कई विकसित देशों की तुलना में काफी कम है, जो घरेलू कंपनियों के लिए अपनी प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने का एक बड़ा, अनछुआ अवसर है।

फसल के बाद होने वाली बर्बादी को कम करने के लिए फूड इरेडिएशन जैसी टेक्नोलॉजी में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। जल्दी खराब होने वाले सामानों की शेल्फ लाइफ बढ़ाकर, किसान मजबूरी में बिक्री से बच सकते हैं और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुँच बना सकते हैं। निवेशकों के लिए, यह कोल्ड चेन, वेयरहाउसिंग और ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग यूनिट्स में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का एक बड़ा मौका है।

सरकारी मदद और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

सरकार छोटे प्लेयर्स की फंडिंग की खाई को पाटने के लिए PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises (PMFME) स्कीम पर ध्यान केंद्रित कर रही है। वित्तीय सहायता और ट्रेनिंग देकर, यह स्कीम प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को डिसेंट्रलाइज करने का लक्ष्य रखती है। मंत्री ने लद्दाख जैसे क्षेत्रों की सफलता की कहानियों का जिक्र किया, जिससे पता चलता है कि कैसे छोटे पैमाने की प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थानीय रोज़गार पैदा कर सकती हैं और मल्टी-करोड़ टर्नओवर वाले बिज़नेस बना सकती हैं, जिससे सेक्टर वैल्यू चेन में ऊपर बढ़ेगा।

वैश्विक स्तर पर कॉम्पिटिटिव ब्रांड बनाना एक लंबा लक्ष्य है। हालांकि प्रोसेसिंग पर जोर मजबूत है, लेकिन सेक्टर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बिज़नेस उत्पादन को बढ़ाते हुए लगातार क्वालिटी स्टैंडर्ड बनाए रखने में कितने सक्षम हैं। इस सेक्टर में निवेश करने वालों को कैपेसिटी यूटिलाइजेशन की दर, कच्चे माल की सोर्सिंग की स्थिरता और कंपनियों की रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स को मैनेज करने की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि वे हायर-वैल्यू प्रोडक्ट कैटेगरी की ओर बढ़ रहे हैं। इस स्पेस में कंपनियों का लॉन्ग-टर्म परफॉरमेंस सीधे किसानों से जुड़ने, लॉजिस्टिक्स को प्रभावी ढंग से मैनेज करने और बदलती उपभोक्ता मांगों को पूरा करने के लिए इनोवेशन को बढ़ाने की उनकी क्षमता से जुड़ा होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.