मानसून की अनियमितता के कारण बुवाई में देरी होने से भारत में जुलाई 2026 में फर्टिलाइजर की बिक्री 13% घटकर **77.44 लाख टन** रह गई। वहीं, खरीफ बुवाई का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले 1.82% कम है, जिससे कृषि क्षेत्र दबाव में है और फर्टिलाइजर निर्माताओं के लिए रूरल डिमांड (Rural Demand) और इन्वेंट्री मैनेजमेंट (Inventory Management) पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जुलाई में फर्टिलाइजर की बिक्री गिरी
भारत में फर्टिलाइजर की खपत में जुलाई 2026 के दौरान खासी कमी देखी गई। खरीफ क्रॉपिंग सीजन के लिए अहम माने जाने वाले इस महीने में, प्रमुख फर्टिलाइजर्स की कुल बिक्री 13% घटकर 77.44 लाख टन रह गई, जबकि जुलाई 2025 में यह 89.41 लाख टन थी। यह गिरावट इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही जारी है, जिसमें अप्रैल से जुलाई के बीच कुल खपत 9% घटकर 191.44 लाख टन हो गई है।
प्रमुख फर्टिलाइजर्स की घटी मांग
अलग-अलग फर्टिलाइजर सेगमेंट में भी कमजोरी दिखी। सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले यूरिया की बिक्री 9% घटकर 49.28 लाख टन रही। कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर्स की बिक्री में 29% की भारी गिरावट आई और यह 15.51 लाख टन पर आ गई, जबकि पोटाश (MOP) की बिक्री 21% घटकर 1.95 लाख टन रही। डाय-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) में मामूली गिरावट दर्ज की गई, जिसकी बिक्री लगभग 10 लाख टन रहने की उम्मीद है।
मानसून का असर और बुवाई में देरी
बिक्री में आई यह कमी मानसून की चाल और कृषि पर इसके प्रभाव से सीधे तौर पर जुड़ी है। जुलाई में बारिश की स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन सीजन की शुरुआत में कमी के कारण कई क्षेत्रों में बुवाई में देरी हुई। 7 अगस्त 2026 तक, खरीफ बुवाई का कुल रकबा 967.92 लाख हेक्टेयर था, जो पिछले साल इसी अवधि के 985.89 लाख हेक्टेयर की तुलना में 1.82% कम है। खास तौर पर, धान की बुवाई 4.4% घटकर 344.78 लाख हेक्टेयर रही, जो फर्टिलाइजर की मांग का एक अहम पैमाना है।
निवेशकों के लिए चिंताएं
निवेशकों के लिए मुख्य चिंता यह है कि फर्टिलाइजर कंपनियां मांग में इस उतार-चढ़ाव के बीच अपने इन्वेंट्री (Inventory) और डिस्ट्रीब्यूशन (Distribution) को कैसे मैनेज करती हैं। जब बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं होती, तो सप्लाई चेन में स्टॉक का स्तर बढ़ सकता है, जिसका असर निर्माताओं की वर्किंग कैपिटल (Working Capital) पर पड़ सकता है। यह इंडस्ट्री ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) में होने वाले बदलावों के प्रति भी संवेदनशील है। हॉरमूज जलडमरूमध्य जैसे क्षेत्रों में संभावित भू-राजनीतिक तनावों से कच्चे माल के आयात की लागत और उपलब्धता पर जोखिम बना हुआ है।
आगे का रास्ता
आगे चलकर, इस सेक्टर का प्रदर्शन फसल की अंतिम पैदावार और बाकी बचे मानसून के वितरण पर निर्भर करेगा। यदि कुछ जिलों में बारिश की कमी जारी रहती है, तो इससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण आय पर और असर पड़ सकता है, जो फर्टिलाइजर की मांग का एक संकेतक है। निवेशक अगस्त और सितंबर के बिक्री आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि इससे पता चलेगा कि क्या इंडस्ट्री इस कमी को पूरा कर पाएगी या फिर धीमी शुरुआत पूरे वित्तीय वर्ष की मांग को प्रभावित करेगी।
