21 जुलाई 2026 को दिल्ली में किसान संगठनों ने अमेरिका और अन्य देशों के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्हें डर है कि कृषि उत्पादों और प्रोसेस्ड फूड्स पर आयात शुल्क में कटौती से घरेलू व्यवसायों को नुकसान हो सकता है। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि ये विरोध प्रदर्शन सरकारी व्यापार नीति को कैसे प्रभावित करते हैं और डेयरी, फूड प्रोसेसिंग और फार्मा जैसे क्षेत्रों पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
Detailed Coverage
क्यों कर रहे हैं किसान प्रदर्शन?
देशभर के किसान संगठन, जिनमें संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देश बचाओ मोर्चा जैसे समूह शामिल हैं, ने 21 जुलाई 2026 को दिल्ली में प्रदर्शन किया। उनका विरोध फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) को लेकर चल रही बातचीत के खिलाफ है, खासकर अमेरिका, यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड के साथ। इन संगठनों का तर्क है कि इन समझौतों से भारत का कृषि क्षेत्र और छोटे विनिर्माण उद्योग भारी सब्सिडी वाले विदेशी सामानों के सामने टिक नहीं पाएंगे।
आर्थिक संरचना और व्यापार जोखिम
किसानों की मुख्य चिंता भारत और पश्चिमी देशों के कृषि सिस्टम के बीच भारी अंतर है। SKM के अनुसार, भारत में लगभग 14.65 करोड़ कृषि होल्डिंग्स हैं, जिनमें से 86% किसानों के पास पांच एकड़ से भी कम जमीन है। वहीं, अमेरिका में किसानों की संख्या काफी कम है और औसत फार्म का आकार 469 एकड़ है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ में कम उत्पादन लागत और सरकारी सब्सिडी के कारण भारतीय किसानों के लिए बाजार में टिकना मुश्किल हो जाएगा, जिससे घरेलू उत्पादकों के दाम गिरेंगे।
किसानों ने डेयरी उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड, वेजिटेबल ऑयल, फ्रूट जूस और विभिन्न तरह के मीट उत्पादों पर ड्यूटी कम करने के प्रस्ताव पर भी चिंता जताई है। उन्हें डर है कि इन आयातों के बढ़ने से घरेलू कृषि व्यवसायों और छोटे प्रोसेसर की कीमत तय करने की क्षमता और बाजार हिस्सेदारी खत्म हो जाएगी।
कृषि के अलावा अन्य क्षेत्रों पर भी असर
यह विरोध सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक और फार्मास्युटिकल क्षेत्रों के लिए भी चिंताएं बढ़ाई गई हैं। किसान समूहों को डर है कि मशीनरी, केमिकल्स, स्टील और मोटर वाहनों पर आयात शुल्क कम होने से माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इसके अलावा, बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights) को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आशंका है कि डेटा एक्सक्लूसिविटी और पेटेंट अवधि बढ़ाने जैसे प्रावधान फार्मा सेक्टर को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे भारत में जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता और लागत पर असर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
सरकारी बातचीत का रुख निवेशकों के लिए एक अहम मुद्दा बना हुआ है। किसानों ने 22 जुलाई 2026 को 'संकल्प दिवस' मनाने की घोषणा की है और कहा है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे अपना अभियान तेज कर सकते हैं। निवेशकों को सरकारी बयानों, टैरिफ संरचना में संभावित बदलावों और इन व्यापार वार्ताओं का डेयरी, फूड प्रोसेसिंग और जेनेरिक फार्मा सेक्टर में सूचीबद्ध कंपनियों पर पड़ने वाले असर पर नजर रखनी चाहिए। व्यापार नीति में कोई भी बदलाव घरेलू उत्पादकों के लाभ मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
