FCI का बड़ा खुलासा: ₹1,160 करोड़ की नहीं, सिर्फ ₹5.6 लाख के चावल की हेराफेरी का मामला

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
FCI का बड़ा खुलासा: ₹1,160 करोड़ की नहीं, सिर्फ ₹5.6 लाख के चावल की हेराफेरी का मामला

फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने एथेनॉल के लिए चावल की ₹1,160 करोड़ की हेराफेरी की खबरों को खारिज कर दिया है। एजेंसी ने साफ किया है कि जांच सिर्फ लगभग ₹5.63 लाख के 242.5 क्विंटल चावल के मामले में चल रही है। सरकार ने संबंधित राइस मिल को पहले ही ब्लैकलिस्ट कर दिया है और गड़बड़ी की जांच शुरू कर दी है।

FCI ने ₹1,160 करोड़ के दावे को किया खारिज

फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने मध्य प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन के लिए चावल की कथित हेराफेरी पर मीडिया में आई खबरों पर अपनी सफाई पेश की है। सरकारी एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि ₹1,160 करोड़ के चावल डायवर्जन की खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और ये सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) के उद्देश्य को गलत तरीके से पेश करती हैं।

जांच का असली दायरा: सिर्फ ₹5.6 लाख

रिपोर्टों में सामने आई ₹1,160 करोड़ की राशि, दरअसल, 2024-25 और 2025-26 सप्लाई सालों के दौरान मध्य प्रदेश की डिस्टिलरीज को एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत सप्लाई किए गए चावल की कुल कीमत को दर्शाती है। FCI के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 साइकिल में ₹22.50 प्रति किलो की दर से 2.98 लाख टन चावल जारी किया गया था, और 30 जून 2026 तक ₹23.20 प्रति किलो की दर से 2.41 लाख टन अतिरिक्त चावल जारी किया गया। एजेंसी ने कहा कि यह एक वैध सप्लाई है और इसे वर्तमान जांच के दायरे से भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए।

वास्तविक जांच, जो राज्य और केंद्रीय अधिकारियों द्वारा की जा रही है, केवल 242.5 क्विंटल चावल से जुड़े एक विशिष्ट मामले पर केंद्रित है, जिसका मूल्य लगभग ₹5.63 लाख है। FCI ने पुष्टि की है कि जून 2026 की शुरुआत में आंतरिक रूप से अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसके बाद यह मामला सार्वजनिक ध्यान में आने से पहले ही तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की गई।

सरकार की सख्त कार्रवाई

जांच जारी रहने के बीच, सरकार ने अपने हितों की रक्षा के लिए कदम उठाए हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इसके अलावा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने संबंधित राइस मिल पर ₹44.12 लाख का जुर्माना लगाया है और उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया है।

केंद्रीय स्तर पर, FCI ने संबंधित डिस्टिलरी की सिक्योरिटी डिपॉजिट (Security Deposit) रोक ली है और फर्म को चावल का कोई भी नया आवंटन निलंबित कर दिया है। इसके अतिरिक्त, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) ने NABARD को इस यूनिट के लिए ब्याज सबvention (Interest Subvention) रोकने का निर्देश दिया है। ये कदम कानूनी और प्रशासनिक जांच आगे बढ़ने के दौरान सार्वजनिक धन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

निवेशक और हितधारक इस स्थिति पर नजर रख सकते हैं कि SIT की जांच से औद्योगिक उपयोग के लिए सब्सिडी वाले अनाज के वितरण में कहीं कोई बड़ी प्रणालीगत खामियां तो नहीं हैं। मुख्य निगरानी योग्य बिंदु औपचारिक जांच का निष्कर्ष और शामिल संस्थाओं के खिलाफ किसी भी अतिरिक्त वसूली या नियामक दंड की संभावना है।

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