मौसम और अर्थव्यवस्था का बदलता रिश्ता
वैसे तो El Niño का नाम सुनते ही भारत में चिंता बढ़ जाती है, क्योंकि इसका सीधा असर मॉनसून पर पड़ता है और खेती-किसानी प्रभावित होती है। 2026 के मध्य तक El Niño के दस्तक देने की 61-70% संभावना जताई जा रही है, जो मॉनसून को सामान्य से कम कर सकता है। लेकिन राहत की बात यह है कि अब भारतीय अर्थव्यवस्था, खासकर ग्रामीण क्षेत्र, मौसम की इन मार को झेलने के लिए कहीं ज्यादा मजबूत हो गया है। इतिहास गवाह है कि 2004 के बाद से El Niño के 7 ऐसे मौकों में से सिर्फ 2 बार ही खेती-किसानी से होने वाली आय (GVA) में बड़ी गिरावट देखी गई, जबकि बारिश की कमी वैसी ही बनी रही।
खेती से परे, आमदनी के कई रास्ते
इस मजबूती की एक बड़ी वजह है ग्रामीण परिवारों की आय के बदलते स्रोत। NABARD की 2022 की एक रिपोर्ट बताती है कि अब ग्रामीण आय का सिर्फ 1/3 हिस्सा खेती से आता है। बाकी 16% मजदूरी से, 15% छोटे-मोटे व्यवसाय (enterprises) से, 23% सरकारी और प्राइवेट नौकरियों से, और 12% पशुपालन जैसे कामों से आ रहा है। यानी, अगर फसल खराब भी हो गई, तो भी लोगों की आमदनी का बड़ा हिस्सा सुरक्षित रहता है।
यह विविध आय ग्रामीण मांग (rural demand) को भी सहारा दे रही है। दोपहिया वाहनों की बिक्री, जो ग्रामीण खर्च का एक अहम पैमाना है, El Niño के पिछले दौरों के बावजूद लगातार बढ़ी है। 2015-16 में यह 3% बढ़ी थी, और 2023-24 में तो 13.3% का उछाल देखा गया।
सोने के लोन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सहारा
बढ़ती सोने की कीमतें ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के लोगों की आर्थिक हालत को और मजबूत कर रही हैं। सोना न सिर्फ सुरक्षा का अहसास देता है, बल्कि जरूरत पड़ने पर लोन लेने के लिए एक बड़ा कोलैटरल (collateral) भी बनता है। यह आय या कीमतों के झटकों के खिलाफ एक कवच का काम करता है।
आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर 2025 तक, कुल गोल्ड लोन का 68% ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से लिया गया था। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में गोल्ड लोन में सालाना अच्छी ग्रोथ दिखी है। 2023 के आखिर से 2025 के आखिर तक, गोल्ड लोन की औसत राशि (average loan amount) लगभग 1.8 गुना बढ़ गई है, जो इस वित्तीय जरिया पर बढ़ती निर्भरता दिखाता है।
रबी की बंपर फसल, मुश्किलों से निपटने में मददगार
ऊपर से, भारत की खेती को रबी की बंपर फसल का भी सहारा मिला है। यह पिछले साल की तुलना में 3.2% ज्यादा होने का अनुमान है, और कीमतें भी बेहतर हैं। पिछले दो सालों में अच्छे मॉनसून के साथ आई यह शानदार फसल, El Niño के कारण खरीफ की फसल पर पड़ने वाले संभावित असर से निपटने के लिए एक मजबूत नींव तैयार करती है।
यह भी माना जा रहा है कि 2026 के अंत में El Niño का असर चरम पर होगा, इसलिए खरीफ की फसल पर इसका बुरा प्रभाव उम्मीद से कम रह सकता है।
