कंपनी का बड़ा वित्तीय फैसला
EID Parry के बोर्ड ने Parry Sugars Refinery India Private Limited (PSRIPL) को बंद करने के लिए ₹740 करोड़ के एक पैकेज को मंजूरी दे दी है। इस फंड में ₹610 करोड़ की इक्विटी और ₹130 करोड़ का लोन शामिल है। इसका मकसद मार्च 2026 तक PSRIPL की अनुमानित ₹998 करोड़ की देनदारियों को पूरा करना है। इन देनदारियों में ₹877 करोड़ बैंक लोन के हैं, जिनकी मुख्य गारंटर EID Parry ही है। हालांकि, एसेट की बिक्री से ₹137 करोड़ की उधारी चुकाने की उम्मीद है, लेकिन बाकी ₹740 करोड़ का इंतजाम EID Parry को ही करना होगा। इसका सीधा असर पैरेंट कंपनी के बैलेंस शीट पर पड़ेगा। यह फैसला एक घाटे वाले ऑपरेशन में लगातार निवेश करने के बजाय, एक निर्णायक राइट-डाउन (नुकसान बुक करना) है। EID Parry वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में एक फाइनेंशियल प्रोविज़न (प्रावधान) और इम्पेयरमेंट चार्ज (संपत्ति के मूल्य में कमी का चार्ज) भी बुक करेगी, जिससे कंपनी के कुल मुनाफे पर असर पड़ेगा।
फेल हुआ एक्सपोर्ट मॉडल
साल 2006 में लॉन्च हुई PSRIPL को इसलिए बनाया गया था ताकि यह कच्ची चीनी इंपोर्ट करे, उसे रिफाइन करे और एक्सपोर्ट करके मुनाफा कमाए। कंपनी को उम्मीद थी कि इंटरनेशनल मार्केट में सफेद चीनी की ऊंची कीमतों का फायदा मिलेगा। इस बिजनेस मॉडल के लिए अच्छे प्रीमियम और सस्ती ऊर्जा, खासकर काकिनारा (Kakinada) में नेचुरल गैस की उपलब्धता बहुत जरूरी थी। लेकिन, इसमें कई दिक्कतें आईं: नेचुरल गैस मिलना बंद हो गया, जिससे कंपनी को महंगे कोयले के बॉयलर इस्तेमाल करने पड़े, और सफेद चीनी पर मिलने वाला प्रीमियम भी काफी कम हो गया। इन बदलावों से बिजनेस घाटे में चला गया। इसके अलावा, फैक्ट्री में हुए हादसे, भारी डिमरेज चार्जेस (विलंब शुल्क), इन्वेंटरी में नुकसान और महंगे फाइनेंसिंग जैसे मुद्दों ने भी इस सब्सिडियरी को चलाना नामुमकिन बना दिया। भले ही PSRIPL ने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में ₹4,262.45 करोड़ का रेवेन्यू (EID Parry के कुल रेवेन्यू का 13.48%) जेनरेट किया हो, लेकिन इसकी नेगेटिव नेट वर्थ (शुद्ध संपत्ति) और बढ़ते घाटे के कारण इसे जारी रखना संभव नहीं था।
इंडस्ट्री की चुनौतियाँ
यह क्लोजर ऐसे समय में हो रहा है जब शुगर इंडस्ट्री खुद मुश्किलों का सामना कर रही है। ग्लोबल शुगर की कीमतें हाल ही में थोड़ी सुधरी हैं, लेकिन पिछले साल के मुकाबले अभी भी काफी कम हैं। 2026 की शुरुआत में भारी ग्लोबल सप्लाई के कारण ये कीमतें कई सालों के निचले स्तर पर पहुंच गई थीं। भारत अपने सरप्लस (अधिशेष) को मैनेज करने और किसानों की मदद के लिए 2025-26 सीजन के लिए चीनी एक्सपोर्ट की इजाजत दे चुका है, लेकिन ग्लोबल कीमतें अस्थिर हैं। साथ ही, तेल की ऊंची ग्लोबल कीमतें गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं, जिससे भविष्य में चीनी की सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ सकता है। PSRIPL के लिए, यह मानना कि उसे काकिनारा में लगातार और सस्ती नेचुरल गैस मिलेगी, एक बड़ी गलती साबित हुई, और कोयले के इस्तेमाल की ऊंची लागत एक लगातार समस्या बनी रही।
वित्तीय जोखिम और एनालिस्ट की राय
हालांकि EID Parry अपने नुकसान को सीमित करने के लिए कदम उठा रही है, ₹740 करोड़ का यह निवेश पैरेंट कंपनी के मुनाफे को प्रभावित करेगा। यह मूव पहले के अनिश्चित नुकसान को निश्चित नुकसान में बदल रहा है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण बैंक कर्ज को इक्विटी और लोन में बदल रहा है। यह क्लोजर यह संकेत देता है कि EID Parry ऐसे ऑपरेशंस का समर्थन नहीं करेगी जो वायबल (लाभदायक) नहीं हो सकते। हालांकि, यह कंपनी के प्लानिंग पर सवाल भी उठाता है कि उन्होंने इतने बड़े, लंबे समय से घाटे वाले बिजनेस को कैसे मैनेज किया। Triveni Engineering & Industries जैसे कंपटीटर्स (प्रतिद्वंद्वी) अनुकूल एक्सपोर्ट नीतियों से फायदा उठा सकते हैं, जो इस सेक्टर में अलग-अलग नतीजों को दर्शाते हैं। EID Parry के शेयर में भी उतार-चढ़ाव रहा है, जो अपने 52-हफ्ते के हाई से काफी गिर चुका है। टेक्निकल संकेत नेगेटिव मोमेंटम की ओर इशारा कर रहे हैं, जो इस क्लोजर के बावजूद निवेशकों के संदेह को दर्शाता है।
इस तत्काल वित्तीय हिट के बावजूद, एनालिस्ट्स (विश्लेषकों) का EID Parry पर नज़रिया काफी हद तक पॉजिटिव बना हुआ है। ज्यादातर एनालिस्ट्स स्टॉक को 'Strong Buy' या 'Outperform' रेटिंग दे रहे हैं। उनके औसत 12-महीने के प्राइस टारगेट ₹1,382 तक पहुंचने का सुझाव देते हैं, जो 70% से अधिक की बढ़त की संभावना दिखाते हैं। एनालिस्ट्स की यह पॉजिटिव आउटलुक, रिफाइनरी क्लोजर की लागत के बावजूद, यह बताती है कि वे इस राइट-डाउन को कंपनी के ऑपरेशंस को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं। उनका मानना है कि EID Parry अब अपने न्यूट्रास्यूटिकल्स (Nutraceuticals) और फार्म इनपुट्स (Farm Inputs) जैसे अधिक लाभदायक क्षेत्रों पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर सकती है। एनालिस्ट्स शायद इस रिफाइनरी क्लोजर को, भले ही यह मुश्किल हो, कंपनी के भविष्य के वित्तीय स्वास्थ्य को सहारा देने वाला एक अहम कदम मानते हैं, क्योंकि यह एक लंबे समय से चले आ रहे बोझ को खत्म कर रहा है।