E.I.D.-Parry का जून तिमाही का नेट प्रॉफिट (Net Profit) **42.5%** गिरकर **₹141.60 करोड़** पर आ गया है, जबकि रेवेन्यू (Revenue) में मामूली बढ़ोतरी हुई है। कंपनी पर बढ़ती ऑपरेशनल लागतों और चीनी व डिस्टिलरी सेगमेंट के खराब प्रदर्शन का भारी दबाव देखा गया।
E.I.D.-Parry के नतीजे: क्या है खास?
E.I.D.-Parry (India) Ltd ने जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट (Consolidated Profit) पिछले साल की इसी अवधि के ₹246.28 करोड़ की तुलना में 42.5% की गिरावट के साथ ₹141.60 करोड़ दर्ज किया गया।Murugappa Group की इस कंपनी का रेवेन्यू मामूली बढ़ा, लेकिन बढ़ती ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational Costs) और कुछ खास सेगमेंट्स (Segments) की कमजोरी ने बॉटम लाइन (Bottom Line) पर भारी असर डाला।
रेवेन्यू बढ़ा, पर प्रॉफिट क्यों घटा?
कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) 3.4% बढ़कर ₹9,017.52 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹8,719.75 करोड़ था। लेकिन, कुल खर्चे 5.3% बढ़कर ₹8,624.59 करोड़ तक पहुंच गए। इस वजह से कंपनी का EBITDA मार्जिन (EBITDA Margin) घटकर 8.3% रह गया, जो पिछले साल 9.2% था। कंसोलिडेटेड EBITDA (Consolidated EBITDA) भी गिरकर ₹750.6 करोड़ हो गया।
बिजनेस सेगमेंट्स का हाल?
- क्रॉप प्रोटेक्शन (Crop Protection): यह बिजनेस इस बार खूब चमका। इसका रेवेन्यू बढ़कर ₹1,250.76 करोड़ हुआ और सेगमेंट रिजल्ट्स (Segment Results) में सुधार आकर ₹170.15 करोड़ दर्ज किए गए।
- न्यूट्रिएंट्स (Nutrients): यह सबसे बड़ा रेवेन्यू देने वाला सेगमेंट है। इसका रेवेन्यू 9.5% बढ़कर ₹6,951.03 करोड़ हुआ, हालांकि पिछले साल की तुलना में प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) में कमी आई।
- चीनी (Sugar): यह सेगमेंट बुरी तरह लड़खड़ा गया। इसका रेवेन्यू काफी घटकर ₹475 करोड़ रह गया, जो पहले ₹1,258.34 करोड़ था। इस सेगमेंट में ₹44.83 करोड़ का प्री-टैक्स और इंटरेस्ट लॉस (Pre-tax and Interest Loss) हुआ।
- अन्य सेगमेंट्स: को-जेनरेशन (Co-generation) और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Consumer Products) सेगमेंट में भी रेवेन्यू घटा, जबकि डिस्टिलरी बिजनेस (Distillery Business) ने भी प्रॉफिटेबिलिटी पर बुरा असर डाला।
सब्सिडियरी का मामला और भविष्य की राह
कंपनी की सब्सिडियरी (Subsidiary), Parry Sugars Refinery India Private Limited (PSRIPL) से जुड़ा ₹19 करोड़ का इंपेयरमेंट चार्ज (Impairment Charge) भी फाइनेंशियल प्रेशर का एक बड़ा कारण बना। स्टैंडअलोन बिजनेस (Standalone Business) में ₹89 करोड़ का लॉस दर्ज हुआ।
आगे चलकर, निवेशकों की नजर कंपनी की बढ़ती ऑपरेशनल लागतों को कंट्रोल करने की क्षमता और चीनी व डिस्टिलरी सेगमेंट्स में मार्जिन सुधारने पर रहेगी। क्रॉप प्रोटेक्शन सेगमेंट का प्रदर्शन कैसा रहता है, यह भी देखना अहम होगा। साथ ही, सब्सिडियरी से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर भी नजरें टिकी रहेंगी।
