प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के प्रमुख, एस. महेंद्र देव ने भारत के कृषि क्षेत्र के लिए एक नई दिशा का प्रस्ताव रखा है। उनका मानना है कि भारत को अपनी कृषि को निर्यात-उन्मुख मॉडल की ओर ले जाना चाहिए, ताकि वैश्विक खाद्य सुरक्षा की बढ़ती मांग का लाभ उठाया जा सके।
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निर्यात के लिए नए बाज़ार और व्यापार समझौते
एस. महेंद्र देव ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की विविध जलवायु हमारे लिए एक बड़ा 'कॉम्पिटिटिव एडवांटेज' है। इस क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करके हम दुनिया की खाद्य ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं। इस रणनीति का एक अहम हिस्सा है - चल रहे और भविष्य के मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) में भारतीय कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाज़ार पहुंच सुनिश्चित करना। देव ने कहा कि इन व्यापारिक संधियों से नए बाज़ार खुलेंगे, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि भारतीय निर्यातकों को गैर-टैरिफ बाधाओं, खासकर यूरोपीय संघ जैसे देशों के सख्त सैनेटरी और टेक्निकल मानकों से निपटना होगा। इन नियमों को पूरा करना भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए प्रीमियम अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए बेहद ज़रूरी है।
टेक्नोलॉजी और R&D से पैदावार बढ़ाना
निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए, सरकार अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश बढ़ाने की वकालत कर रही है। यह ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि कृषि R&D से उत्पादकता और फसल की मजबूती बढ़ती है, जिससे किसानों को काफी फायदा होता है। खास तौर पर, जीन-एडिटिंग तकनीक को फसलों की पैदावार में ज़बरदस्त वृद्धि लाने के एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में देखा जा रहा है। यह कृषि नीति में एक बड़ा बदलाव है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक खेती के तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक प्रगति को अपनाना है, ताकि घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह की मांगों को पूरा किया जा सके।
खेती में डिजिटल टूल्स और AI का इस्तेमाल
जीन तकनीक के अलावा, खेती के आधुनिकीकरण के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी अहम है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मांग और आपूर्ति का बेहतर पूर्वानुमान लगाने के लिए प्राथमिकता दी जा रही है। इससे कीमतों को स्थिर रखने और बर्बादी को कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, डिजिटल टूल्स और सैटेलाइट इमेजरी किसानों को उर्वरकों के सटीक उपयोग जैसे संसाधनों के अनुकूलन में मदद कर रहे हैं। ब्लॉकचेन तकनीक को भी पारदर्शिता और पता लगाने की क्षमता (traceability) सुनिश्चित करने के लिए खोजा जा रहा है, खासकर उच्च-मूल्य वाले निर्यात फसलों के लिए जहां गुणवत्ता की पुष्टि महत्वपूर्ण होती है। निवेशकों के लिए, कृषि तकनीक, विशेष बीज और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना जारी रहेगा, क्योंकि सरकार निर्यात मानकों और कृषि दक्षता में सुधार के लिए व्यवस्थित बदलावों को बढ़ावा दे रही है। इस रणनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये तकनीकी समाधान देश के विविध कृषि परिदृश्य में कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से लागू किए जा सकते हैं।
