Q3 में चीनी की दमदार कीमतों से चमकी Dwarikesh Sugar
Dwarikesh Sugar Industries Limited (DSIL) ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में अपने निवेशकों को राहत दी है। इस अवधि में कंपनी का टोटल इनकम 3.7% की बढ़ोतरी के साथ ₹3,281.6 मिलियन रहा। कंपनी के EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) में 31.7% का शानदार उछाल आया और यह ₹406.8 मिलियन पर पहुंच गया। EBITDA मार्जिन भी 260 बेसिस पॉइंट्स (bps) सुधरकर 12.5% हो गया। सबसे अहम बात यह है कि नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 43.9% बढ़कर ₹154.4 मिलियन दर्ज किया गया, जबकि प्रति शेयर आय (EPS) ₹0.83 रही, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹0.58 थी।
9 महीने में ऑपरेशनल चुनौतियां हावी, हुआ बड़ा घाटा
हालांकि, साल के शुरुआती नौ महीनों (9M FY26) के आंकड़े चिंताजनक हैं। इस अवधि में कंपनी का टोटल रेवेन्यू तो 8.4% बढ़कर ₹9,823.6 मिलियन हो गया, लेकिन लाभप्रदता (profitability) गंभीर रूप से प्रभावित हुई। EBITDA में 51.6% की भारी गिरावट आई और यह घटकर सिर्फ ₹61.5 मिलियन रह गया। EBITDA मार्जिन भी लुढ़ककर 0.6% पर आ गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 1.4% था। कंपनी को 9M FY26 में ₹265.7 मिलियन का नेट लॉस हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह घाटा ₹229.9 मिलियन था। प्रति शेयर आय (EPS) भी -₹1.43 रही।
प्रदर्शन के पीछे की वजहें और आने वाली चुनौतियां
Q3 में मिली इस मजबूती का मुख्य कारण घरेलू चीनी की कीमतों में आई तेजी रही। प्रति क्विंटल चीनी की कीमत 6.4% बढ़कर ₹4,013 हो गई, जिससे चीनी बिक्री से होने वाले रेवेन्यू में 11% की बढ़ोतरी हुई। डिस्टिलरी सेगमेंट ने भी 9 महीने की अवधि में 70.1% EBITDA ग्रोथ के साथ सकारात्मक योगदान दिया।
वहीं, 9 महीने के कमजोर प्रदर्शन के पीछे कंपनी के ऑपरेशनल कारण रहे। मार्च 2025 में क्रशिंग ऑपरेशंस (गन्ना पेराई) लगभग बंद होने से फिक्स्ड ओवरहेड्स का ठीक से अवशोषण (absorption) नहीं हो पाया, जिससे लागत बढ़ गई। साथ ही, इस अवधि में बेची गई चीनी में महंगी ओपनिंग स्टॉक शामिल था, जिसने मार्जिन को और कम कर दिया। इन्वेंट्री में बदलाव ने रिपोर्टेड रेवेन्यू को तो बढ़ाया, लेकिन यह परिचालन लागत के दबाव को पूरी तरह से कम नहीं कर सका। कंपनी मैनेजमेंट ने आने वाले शुगर सीजन (SS) 2025-26 के लिए फसल की पैदावार कम रहने की आशंका भी जताई है।
मैनेजमेंट का रुख और भविष्य की राह
कंपनी मैनेजमेंट का मानना है कि सरकार की नीतियां, जैसे कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) बढ़ाना और इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को जारी रखना, भविष्य में बाजार को सहारा दे सकती हैं। कंपनी को उम्मीद है कि SS 2026-27 में प्रदर्शन सुधरेगा, बशर्ते SS 2025-26 की चुनौतियों से पार पाया जा सके। कंपनी अपनी परिचालन दक्षता (operational efficiencies) बढ़ाने और लागत नियंत्रण (cost controls) पर जोर दे रही है। अच्छी खबर यह भी है कि लोन चुकाने के कारण फाइनेंस कॉस्ट में कमी आई है।