राजस्थान, गुजरात और दक्षिण भारत के कई राज्यों में मॉनसून की बेरुखी से फसलों पर बुरा असर पड़ रहा है। इस ड्राई स्पेल से एग्रीकल्चरल यील्ड और ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ने की आशंका है, जो रबी सीजन के लिए भी एक चुनौती है।
भारत में मॉनसून की विदाई के साथ ही पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं। महालनोबिस नेशनल क्रॉप फोरकास्ट सेंटर (NCFC) के अनुसार, लंबे समय तक बारिश न होने के कारण राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में फसलों की स्थिति नाजुक बनी हुई है। इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने भी अक्टूबर के करीब होने के बावजूद इन क्षेत्रों में लंबे 'ड्राई पैच' की पुष्टि की है।
सैटेलाइट डेटा और फसलों की सेहत
सैटेलाइट मॉनिटरिंग और VIIRS डेटा से साफ पता चलता है कि एग्रीकल्चरल हेल्थ में गिरावट आई है। राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में NDVI वैल्यू अपने 5 साल के औसत से 30% से ज्यादा गिर गई है। जैसलमेर, बीकानेर और कच्छ जैसे जिलों में मिट्टी की नमी (Root Zone Soil Moisture) का स्तर बहुत कम हो गया है, जिससे फसलों की ग्रोथ रुक गई है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों को उन राज्यों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है जहां इरिगेशन कवरेज 25% से कम है। पानी की कमी का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित सेक्टरों जैसे- ट्रैक्टर निर्माता, फर्टिलाइजर कंपनियां और FMCG पर पड़ सकता है। केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission) ने भी पश्चिमी और दक्षिणी जलाशयों में पानी के स्तर को लेकर अलर्ट जारी किया है, जिसका सीधा असर रबी सीजन की बुवाई पर पड़ सकता है। आने वाले महीनों में जलाशयों में पानी की स्थिति और रबी फसलों की बुवाई की प्रगति मार्केट सेंटीमेंट तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
