बदलते मौसम और मानसून की अनिश्चितता के कारण भारतीय किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी और पशुपालन जैसे विकल्पों को अपना रहे हैं। कमाई में स्थिरता लाने के लिए हो रहा यह बदलाव अब निवेशकों के रडार पर भी है।
क्लाइमेट चेंज ने भारतीय कृषि के बुनियादी ढांचे को बदल कर रख दिया है। स्वदेश फाउंडेशन (Swades Foundation) के CEO मंगेश वांगे के अनुसार, अनिश्चित बारिश और मौसम के मिजाज ने किसानों को पारंपरिक खेती के मॉडल से हटने के लिए मजबूर किया है। अब किसान केवल एक फसल पर निर्भर रहने के जोखिम को कम करना चाहते हैं।
पानी का बेहतर प्रबंधन
खेती को बचाने के लिए अब बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ 'डीसेंट्रलाइज्ड' वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया जा रहा है। किसान अब अपने स्तर पर 'फार्म पोंड्स' (खेत तालाब) बना रहे हैं ताकि सूखे के समय भी फसलों को पानी मिल सके।
कमाई के लिए नया 'मॉडल'
सिर्फ अनाज उगाने के बजाय किसान अब बागवानी (Horticulture) और औषधीय पौधों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनमें मुनाफा बेहतर है। इसके साथ ही, दूध, बकरी पालन और पोल्ट्री को जोड़कर किसान एक 'फाइनेंशियल हेज' बना रहे हैं। इससे फसल बर्बाद होने पर भी परिवार की आय पर सीधा असर नहीं पड़ता।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह बदलाव एग्री-वैल्यू चेन से जुड़ी कंपनियों के लिए बड़े मौके लेकर आया है।
- Godrej Agrovet और Hatsun Agro जैसी कंपनियां जो पशु आहार और डेयरी में हैं, उनकी मांग बढ़ सकती है।
- UPL और Kaveri Seed जैसी कंपनियां भी अपने पोर्टफोलियो को नए और वैल्यू-एडेड क्रॉप्स के अनुसार ढाल रही हैं।
हालांकि, नई तकनीकों और पशुपालन को शुरू करने के लिए शुरुआती लागत (Capital Expenditure) काफी अधिक है। निवेशकों को सरकार की सिंचाई नीतियों और ग्रामीण क्रेडिट सेक्टर पर पैनी नजर रखनी होगी, क्योंकि यही इस बदलाव की गति तय करेंगे।
