केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने किसानों से Free Trade Agreements (FTAs) का लाभ उठाकर ग्लोबल मार्केट में पैठ बनाने की अपील की है। उन्होंने इंटरनेशनल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स और क्षेत्र के हिसाब से रवि-खरीफ फसलों की प्लानिंग पर जोर दिया है, जो भविष्य में एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर के लिए बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने हाल ही में दक्षिण भारतीय राज्यों के क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि भारत के पास जो Free Trade Agreements (FTAs) हैं, उनका भरपूर फायदा उठाने का समय आ गया है। मंत्री के अनुसार, अगर भारतीय किसान इंटरनेशनल क्वालिटी के स्टैंडर्ड्स को अपना लें, तो वैश्विक बाजार में भारत के फलों, सब्जियों और अनाज का डंका बज सकता है।
क्यों जरूरी है 'क्वालिटी' पर फोकस?
मंत्री का यह रुख भारतीय कृषि को ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की एक नई रणनीति है। हालांकि भारत फसलों का बड़ा उत्पादक है, लेकिन एक्सपोर्ट के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पालन करना अनिवार्य है। सरकार का लक्ष्य अब भारतीय पैदावार को FTA पार्टनर देशों की जरूरतों के अनुसार ढालना है।
रवि और खरीफ के लिए नई स्ट्रैटेजी
सरकार अब एक जैसी 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' वाली कृषि नीति से आगे बढ़ना चाहती है। इसके बजाय, रवि और खरीफ फसलों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट (Region-specific) प्लानिंग पर जोर दिया जा रहा है। इसका फायदा यह होगा कि:
- मिट्टी और पानी जैसे संसाधनों का सही इस्तेमाल हो पाएगा।
- सीड, फर्टिलाइजर और एग्रो-केमिकल कंपनियों के लिए डिमांड साइकिल अधिक प्रेडिक्टेबल होगी।
- खेती के तरीकों में तालमेल से पैदावार और एफिशिएंसी में सुधार आएगा।
ग्लोबल चैलेंज और क्लाइमेट रिस्क
सम्मेलन में El Niño जैसे क्लाइमेट पैटर्न के असर पर भी चर्चा हुई। सरकार का फोकस अब ऐसी फसलों पर है जो बदलते मौसम के अनुकूल हों, ताकि महंगाई और एक्सपोर्ट सप्लाई चेन पर बुरा असर न पड़े। निवेशकों के लिए नजर इस बात पर होनी चाहिए कि राज्य सरकारें इस नई फ्रेमवर्क को कितनी तेजी से जमीन पर उतारती हैं, क्योंकि इसी पर कृषि क्षेत्र की भविष्य की ग्रोथ टिकी है।
