India Rice Exporters पर China की बड़ी कार्रवाई! GMO के चक्कर में 7 कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Rice Exporters पर China की बड़ी कार्रवाई! GMO के चक्कर में 7 कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड

चीन के कस्टम अथॉरिटी ने जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) की मिलावट के आरोप में सात भारतीय चावल निर्यातकों (rice exporters) के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं। इस कदम से भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की गई है, क्योंकि भारतीय उद्योग निकायों का कहना है कि भारत में व्यावसायिक रूप से जीएम चावल की खेती नहीं होती है।

चीन के एक्शन से मचा हड़कंप

भारत और चीन के बीच कृषि क्षेत्र में व्यापारिक रिश्ते एक बार फिर तनाव में आ गए हैं। चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स (GACC) ने सात भारतीय चावल निर्यातकों के रजिस्ट्रेशन लाइसेंस को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि इन शिपमेंट्स में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) के अंश पाए गए थे। हालांकि, भारत में उद्योग जगत इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है।

सरकार से की गई मदद की अपील

छत्तीसगढ़ राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने इस मामले में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से केंद्र सरकार के हस्तक्षेप का आग्रह किया है। एसोसिएशन का कहना है कि चीन के निष्कर्ष भारतीय कृषि की असलियत के विपरीत हैं, जहां जेनेटिकली मॉडिफाइड चावल की व्यावसायिक खेती पर सख्क्त पाबंदी है। एसोसिएशन के अनुसार, जिन निर्यात खेपों पर रोक लगाई गई है, वे भेजने से पहले नॉन-जीएमओ के लिए स्थानीय टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन प्रोटोकॉल पास कर चुकी थीं।

पहली बार नहीं है ऐसी घटना

यह कोई एक घटना नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने इससे पहले भी 2026 की शुरुआत में कम से कम 70 भारतीय नॉन-बासमती चावल की खेपों को रिजेक्ट किया था। निर्यात लाइसेंस के पूर्ण निलंबन से पहले केवल रिजेक्शन का मामला था, लेकिन अब इस कार्रवाई ने प्रभावित कंपनियों के लिए भारी वित्तीय और परिचालन तनाव पैदा कर दिया है। इनमें से कई स्मॉल और मीडियम साइज की कंपनियां हैं। इन निर्यातकों के मुनाफे का मार्जिन अक्सर काफी कम होता है, और माल क्लियर न होने या खरीदारों का भरोसा बनाए रखने में विफलता से लिक्विडिटी की समस्या और इन्वेंट्री का दबाव बढ़ सकता है।

जांच और टेस्टिंग का विवाद

इस विवाद की जड़ में भारत में की गई लैब टेस्टिंग और चीन के डेस्टिनेशन पोर्ट पर की गई टेस्टिंग के बीच तकनीकी विसंगतियां बताई जा रही हैं। भारतीय उद्योग टेस्टिंग मेथोडोलॉजी, सैंपलिंग प्रोटोकॉल और स्टैंडर्ड लैब प्रोसीजर की तुलना के लिए एक संयुक्त वैज्ञानिक और तकनीकी समीक्षा की मांग कर रहा है। ऐसी समीक्षा यह निर्धारित करने के लिए आवश्यक होगी कि टेस्टिंग के नतीजे अलग-अलग क्यों आ रहे हैं और भविष्य में व्यापारिक रुकावटों को रोकने के लिए एक सुसंगत ढांचा कैसे स्थापित किया जाए।

निर्यात पर क्या पड़ सकता है असर?

इस विशेष विवाद से परे, व्यापक कृषि क्षेत्र के लिए जोखिम और भी बड़े हैं। अगर इन आरोपों को कूटनीतिक और वैज्ञानिक चैनलों के माध्यम से संबोधित नहीं किया गया, तो यह उच्च-गुणवत्ता वाले, नॉन-जीएमओ चावल के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है। यह विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि यूरोपीय संघ जैसे अन्य बड़े आयातक आमतौर पर खाद्य आयात पर कड़ी जांच लागू करते हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय खरीदार एक आवर्ती गुणवत्ता मुद्दे को देखते हैं, तो इससे कड़ी परीक्षण आवश्यकताओं या सबसे खराब स्थिति में, व्यापार प्रतिबंध लग सकते हैं, जो निर्यात की मात्रा और मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करेगा।

निवेशक और कृषि निर्यात क्षेत्र के हितधारक संभवतः इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या भारतीय सरकार चीनी अधिकारियों के साथ सफल बातचीत करके लाइसेंस बहाल करवा पाती है। इन वार्ताओं का परिणाम चावल निर्यात व्यापार की स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक होगा। इसके अतिरिक्त, यदि निर्यात की गई खेपें बिक नहीं पाती हैं और स्थानीय बाजार में वापस आ जाती हैं, तो बाजार सहभागियों द्वारा घरेलू चावल की कीमतों पर किसी भी संभावित प्रभाव पर भी नजर रखी जा सकती है, जिससे आपूर्ति की अधिकता हो सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.