Union Budget 2026: खेती-किसानी का बजट बढ़ा, पर फसल बीमा पर झटका, AI पर सवाल

AGRICULTURE
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Union Budget 2026: खेती-किसानी का बजट बढ़ा, पर फसल बीमा पर झटका, AI पर सवाल
Overview

Union Budget 2026 में कृषि क्षेत्र के लिए कुल **7%** की बढ़ोतरी के साथ **₹1.62 लाख करोड़** का आवंटन किया गया है। हालांकि, किसानों के लिए राहत की बजाय चिंताएं बढ़ी हैं। सरकार ने फसल बीमा (PMFBY) के फंड में कटौती की है, जबकि एक नए AI टूल 'भारत-VISTAAR' के लिए **₹150 करोड़** का ऐलान किया है, जिस पर किसान समूह सवाल उठा रहे हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में 'भारत-VISTAAR' नामक एक नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल के लिए ₹150 करोड़ का आवंटन किया है। यह टूल एग्रीकल्चर डेटा पोर्टल्स और ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) की प्रैक्टिसेज को इंटीग्रेट करेगा, ताकि खेती की प्रोडक्टिविटी को बढ़ाया जा सके और किसानों को कस्टमाइज्ड एडवाइजरी दी जा सके।

लेकिन, इस डिजिटल फोकस से किसान समूहों, वैज्ञानिकों और नागरिक समाज संगठनों में चिंताएं बढ़ गई हैं। उनका मानना ​​है कि ऐसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल प्राइवेट कंपनियां अपने एग्रोकेमिकल और बीज उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कर सकती हैं, जिससे हितों का टकराव पैदा हो सकता है और किसानों की असली जरूरतों को नजरअंदाज किया जा सकता है।

फसल बीमा पर कैंची

जहां एक ओर AI पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर किसानों की सबसे बड़ी सुरक्षा मानी जाने वाली फसल बीमा योजना पर बजट में कैंची चला दी गई है। प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का एलोकेशन ₹12,267 करोड़ से घटाकर ₹12,200 करोड़ कर दिया गया है। यह पिछले आठ सालों में इस योजना का सबसे कम बजट एलोकेशन है।

यह कटौती तब की गई है जब मौसम संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले 2025 के पहले नौ महीनों में 9.47 मिलियन हेक्टेयर से अधिक फसलें क्षतिग्रस्त हुईं, जो 2022 की तुलना में 400% की भारी बढ़ोतरी है। मौजूदा एलोकेशन 2024-25 में हुए ₹14,473 करोड़ के वास्तविक खर्च से भी 15.7% कम है।

प्राकृतिक खेती का फंड भी कम

यहीं नहीं, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय मिशन (NMNF) के लिए केवल ₹750 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो कि पिछले साल की तुलना में मामूली 3.4% की बढ़ोतरी है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि देशव्यापी केमिकल-फ्री खेती को बढ़ावा देने और सिंथेटिक इनपुट पर किसानों की निर्भरता कम करने जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को देखते हुए यह राशि अपर्याप्त है। सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के जी. वी. रमनजनेयुलु का कहना है कि इस तरह के फंडिंग लेवल से यह प्रोग्राम सिर्फ प्रदर्शन तक ही सीमित रह जाएगा, न कि बड़े पैमाने पर बदलाव ला पाएगा।

रद्द हुई योजनाएं, पॉलिसी में बदलाव के संकेत

इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले बजट में बड़े उत्साह के साथ घोषित की गई कई विशिष्ट मिशनों को इस बार फंड ही नहीं मिला। इनमें 'कॉटन टेक्नोलॉजी मिशन', 'मिशन फॉर पल्सेस', 'मिशन फॉर वेजिटेबल्स एंड फ्रूट्स', और 'नेशनल मिशन ऑन हाइब्रिड सीड्स' जैसे पहल शामिल थे, जिन्हें पहले ₹500 करोड़ से ₹1,000 करोड़ तक का एलोकेशन मिलना था। लेकिन, 2025-26 के रिवाइज्ड एस्टिमेट्स और 2026-27 के बजट में इन्हें शून्य फंड मिला है। सस्टेनेबल एंड होलिस्टिक एग्रीकल्चर (ASHA-Kisan Swaraj) के लिए बने गठबंधन ने इसे सरकार के इन कार्यक्रमों को लागू करने की मंशा की कमी का सबूत बताया है।

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