बिहार ने कृषि निर्यात में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है! पहली बार, राज्य से **18 मीट्रिक टन** जीआई-टैग वाले मिथिला मखाने की सी-शिपमेंट ऑस्ट्रेलिया भेजी गई है। यह पहल किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई है, जिससे उन्हें **18%** अधिक मुनाफा मिला है।
सीधा किसानों से खरीद, मुनाफा दोगुना!
यह ऐतिहासिक निर्यात कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की मदद से संभव हुआ। दरभंगा जिले में सीधे किसानों से मखाने की खरीद की गई, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई। इसके नतीजतन, किसानों को स्थानीय बाजार की तुलना में लगभग 18% अधिक मूल्य मिला। यह कदम राज्य में कृषि निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने की सरकारी रणनीति का एक अहम हिस्सा है। बिहार भारत के कुल मखाना उत्पादन का करीब 85-90% हिस्सा पैदा करता है।
जीआई टैग का बढ़ा महत्व
साल 2022 में जीआई (Geographical Indication) टैग प्राप्त मिथिला मखाना अब वैश्विक बाजार में एक प्रीमियम उत्पाद के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। जीआई टैग उत्पाद की गुणवत्ता और उत्पत्ति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में मदद करता है। सरकार इस उत्पाद के निर्यात को और सुगम बनाने के लिए आधुनिक विकिरण, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी बुनियादी सुविधाओं में निवेश कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उत्पाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरे।
चुनौतियां और भविष्य की राह
यह निर्यात बिहार के किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी जीत है, लेकिन राज्य के कृषि क्षेत्र के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। मखाना की खेती के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है, और जलवायु परिवर्तन उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, निर्यातकों को कड़े अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा नियमों और बढ़ती लॉजिस्टिक लागतों का भी सामना करना पड़ेगा। वैश्विक बाजार में कीमत और गुणवत्ता को लेकर संवेदनशीलता बनी रहती है, इसलिए निरंतरता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। भविष्य में, इस मॉडल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि गुणवत्ता मानकों को कैसे बनाए रखा जाता है और अन्य जीआई-टैग वाले उत्पादों के लिए निर्यात बुनियादी ढांचे का विस्तार कैसे किया जाता है।
