PepsiCo India और Bayer CropScience ने मिलकर **3** साल के 'HARVEST' प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस पहल से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के **35,000** मक्का किसानों को सीधा फायदा होगा और कंपनी अपनी सप्लाई चेन को मजबूत बनाएगी।
PepsiCo India, Bayer CropScience और जर्मन विकास एजेंसी GIZ ने संयुक्त रूप से इस खास 'HARVEST' (Holistic Agricultural Climate Resilience and Versatile Ecosystem Strengthening Techniques) पहल को लॉन्च किया है। 4 नवंबर, 2026 को घोषित यह 3 साल का प्रोग्राम महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के 35,000 किसानों को नई तकनीक से लैस करेगा। इस प्रोजेक्ट को जर्मन फेडरल मिनिस्ट्री का समर्थन प्राप्त है और इसमें Indian Institute of Maize Research भी तकनीकी मार्गदर्शन देगा।
रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर पर फोकस
इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेती के तरीकों को बदलकर 'रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर' को बढ़ावा देना है। इसमें मिट्टी का सही प्रबंधन, पानी की बचत और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) पर जोर दिया जाएगा, ताकि बदलती जलवायु के बीच मक्का की पैदावार सुरक्षित रहे।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
Bayer CropScience के लिए यह साझेदारी अपने इकोसिस्टम को मजबूत बनाने की एक बड़ी रणनीति है। किसानों को वैज्ञानिक खेती सिखाने से कंपनी अपने सीड्स और क्रॉप प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स की मांग को लंबे समय तक सुरक्षित कर पाएगी। वहीं, PepsiCo के लिए मक्का एक जरूरी कच्चा माल है, जो उसके स्नैक्स बिजनेस का आधार है। अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करके कंपनी भविष्य में होने वाले प्राइस स्पाइक्स और कच्चे माल की किल्लत के जोखिम को कम करना चाहती है।
चुनौतियां और जोखिम
हालांकि यह पहल अच्छी है, लेकिन भारत जैसे देश में हजारों छोटे किसानों तक इन तकनीकों को पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। इसकी सफलता पूरी तरह से किसानों द्वारा नई तकनीक को अपनाने और इससे होने वाले आर्थिक फायदों पर निर्भर करेगी। साथ ही, यह प्रोग्राम मौसम की चरम स्थितियों (Extreme Weather) के जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता, जो पूरे एग्री सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
