Bayer CropScience ने अपने 'DirectAcres' प्रोग्राम का दायरा भारत में **2 लाख** एकड़ तक बढ़ा दिया है। इस पहल का मकसद Direct Seeded Rice (DSR) तकनीक के जरिए पानी और लेबर की किल्लत से निपटना है।
बाजार में दबदबा बनाने की रणनीति
Bayer CropScience ने 2026 सीजन के लिए अपने 'DirectAcres' इनिशिएटिव को 2 लाख एकड़ तक फैला दिया है। यह प्रोग्राम Direct Seeded Rice (DSR) तकनीक पर आधारित है, जो पारंपरिक तरीके से कहीं ज्यादा पानी की बचत करता है। निवेशकों के लिए यह केवल एक सस्टेनेबिलिटी का कदम नहीं, बल्कि कंपनी के अपने प्रीमियम सीड्स और क्रॉप प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स की मांग को लॉक-इन करने की एक सोची-समझी रणनीति है।
कैसे काम कर रहा है ये मॉडल?
DSR मॉडल की कामयाबी के लिए सीड्स, खरपतवार नाशक (weed control) केमिकल और डिजिटल सलाह का सही मिश्रण जरूरी है। यह 'एंड-टू-एंड' सपोर्ट देकर Bayer अपने प्रोडक्ट्स के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बना रही है। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक 10 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने का है। यह कदम खेती में बढ़ती सरकारी सख्ती के बीच कंपनी को लॉन्ग-टर्म मार्केट लीडर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।
फाइनेंशियल सेहत और परफॉर्मेंस
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹18,350 मिलियन रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 4% कम है। हालांकि, इसके बावजूद कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) 20% बढ़कर ₹4,021 मिलियन पर पहुंच गया है। यह दिखाता है कि कंपनी अपने कॉस्ट मैनेजमेंट और प्रोडक्ट मिक्स में सुधार कर रही है। साथ ही, 0.03 का लो डेट-टू-इक्विटी रेशियो यह साबित करता है कि कंपनी की बैलेंस शीट काफी मजबूत है।
निवेश का रिस्क और भविष्य
निवेशकों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि कृषि क्षेत्र काफी हद तक मौसम और एल नीनो (El Niño) जैसे क्लाइमेट रिस्क पर निर्भर है। क्या यह नया 'सॉल्यूशन-सेलिंग' मॉडल रेवेन्यू में होने वाली उतार-चढ़ाव को थाम पाएगा? यह आने वाले समय में मार्जिन को बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
