यह पुनर्गठन कंपनी के वित्तीय ढांचे को मजबूत करने और दिवालिया होने जैसी स्थिति से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्लान का मुख्य हिस्सा ₹3,215.31 करोड़ के OCDs और ₹2,939.97 करोड़ के YTM को इक्विटी और CCPS में बदलना है, जिससे कुल मिलाकर लगभग ₹6,155.28 करोड़ के कर्ज का पुनर्गठन होगा।
इसके अलावा, प्रमोटरों की ओर से FY2025-26 तक ₹1,000 करोड़ का नया निवेश (Infusion) किया जाएगा, जिसमें से ₹630.79 करोड़ पहले ही जून 2025 में डाले जा चुके हैं।
इस पुनर्गठन के तहत, लगभग ₹570.03 करोड़ YTM को इक्विटी शेयरों में बदला जाएगा। बाकी बचे YTM (₹2,369.94 करोड़) और MRA (₹485.60 करोड़) को लेंडर्स के लिए कम्पलसरी कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स (CCPS) में बदला जाएगा।
पुनर्गठित OCDs की अवधि बढ़ाकर 15 साल कर दी गई है, जिसमें 6 साल का मोरेटोरियम (1 अप्रैल, 2025, से 30 मार्च, 2031) शामिल है। इन पर कूपन रेट भी घटाकर सिर्फ 0.20% प्रति वर्ष कर दिया गया है। OCDs पर YTM एकरुआल को माफ कर दिया गया है। वहीं, CCPS की अवधि 20 साल तक हो सकती है, जिस पर नाममात्र का 0.01% कूपन रेट होगा।
इस पूरी प्रक्रिया से मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी में खासा डाइल्यूशन होने की आशंका है, क्योंकि कर्जदाताओं को कंपनी में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी मिल जाएगी। यह प्लान कंपनी को उसकी देनदारियों को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने और वित्तीय सेहत सुधारने में मदद कर सकता है, खासकर तब जब कंपनी पहले भी भुगतान में चूक (Defaults) जैसी समस्याओं का सामना कर चुकी है।
अब कंपनी की नजरें शेयरधारकों की मंजूरी पर टिकी हैं, जिसके लिए एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाई जाएगी। इस बड़े पुनर्गठन की सफलता, शुगर इंडस्ट्री की साइक्लिकल प्रकृति और सरकारी नीतियों पर भी निर्भर करेगी। आने वाले क्वार्टर कंपनी के लिए यह साबित करने में महत्वपूर्ण होंगे कि वह नए कैपिटल स्ट्रक्चर में कैसे परफॉर्म करती है।