Bajaj Hindusthan Sugar: मुनाफे की आड़ में छिपे बड़े जोखिम?
कंपनी ने दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाही (Q3 FY26) में ₹14.71 करोड़ का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल इसी अवधि में दर्ज ₹101.48 करोड़ के बड़े घाटे से एक महत्वपूर्ण सुधार है। स्टैंडअलोन बेसिस पर भी कंपनी ने ₹15.06 करोड़ का मुनाफा कमाया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में ₹99.34 करोड़ का घाटा था।
हालांकि, इन आंकड़ों के पीछे एक गंभीर चिंता छिपी है। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू इसी अवधि में 6.4% घटकर ₹1,380.44 करोड़ रहा। इससे भी बड़ी बात यह है कि ऑडिटर की रिपोर्ट में ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (OCDs) से जुड़ी ₹4,131.57 करोड़ की ऐसी देनदारियों का जिक्र किया गया है, जिन्हें अभी तक बैलेंस शीट में नहीं दिखाया गया है। इन देनदारियों में मैच्योरिटी यील्ड और कूपन इंटरेस्ट भी शामिल हैं, जिनका कुल आंकड़ा 31 दिसंबर 2025 तक ₹4,131.57 करोड़ तक पहुंच जाता है।
अगर मानी जाएं देनदारियां तो क्या होगा?
ऑडिटर की मानें तो, अगर इन कंटिंजेंट लायबिलिटीज को वित्तीय खातों में शामिल किया जाता है, तो इसके परिणाम बहुत गंभीर होंगे। Q3 FY26 का रिपोर्टेड ₹14.71 करोड़ का मुनाफा ₹188.07 करोड़ के भारी नुकसान में बदल जाएगा। वहीं, 9 महीने (9M FY26) के कंसॉलिडेटेड नेट लॉस की बात करें तो, यह ₹264.54 करोड़ से बढ़कर ₹860.22 करोड़ हो जाएगा। इस स्थिति में, कंपनी का स्टैंडअलोन नेट वर्थ ₹195.57 करोड़ नेगेटिव हो जाएगा, जबकि कंसॉलिडेटेड नेट वर्थ ₹360.29 करोड़ नेगेटिव हो जाएगा।
गोइंग कंसर्न पर ऑडिटर की गंभीर चेतावनी
ऑडिटर ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि इन अन-रिकॉग्नाइज्ड लायबिलिटीज के कारण कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (यानी, भविष्य में सामान्य तरीके से व्यवसाय चलाते रहने की क्षमता) को लेकर 'मटेरियल अनिश्चितता' (Material Uncertainty) बनी हुई है। दूसरी ओर, कंपनी का मैनेजमेंट भविष्य में अपनी वित्तीय और परिचालन जिम्मेदारियों को पूरा करने में सक्षम होने का भरोसा जता रहा है। मैनेजमेंट ने कर्ज कम करने और अनुकूल बाजार की स्थितियों का हवाला दिया है। मैनेजमेंट के इस दावे और ऑडिटर की गंभीर चेतावनी के बीच का यह अंतर निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण बन गया है।
आगे क्या?
कंपनी की सबसे बड़ी चुनौती उसके अस्थिर कर्ज को सुलझाना है, जिस पर बैंकों के साथ बातचीत चल रही है। यह एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगा। सबसे बड़ा और तत्काल जोखिम ₹4,131.57 करोड़ की इन अन-रिकॉग्नाइज्ड कंटिंजेंट लायबिलिटीज से जुड़ा है। अगर इस देनदारी का समाधान नहीं किया गया, तो यह कंपनी को गंभीर वित्तीय संकट में डाल सकता है, दिवालियापन की ओर ले जा सकता है या उसकी वित्तीय स्थिति का पूरी तरह से पुनर्मूल्यांकन करवा सकता है। निवेशकों को इस बात पर बारीकी से नजर रखनी होगी कि कर्ज समाधान योजना को लेकर बैंकों के साथ क्या प्रगति होती है। कंटिंजेंट लायबिलिटीज को मान्यता देने या उन्हें निपटाने की दिशा में कोई भी कदम महत्वपूर्ण होगा। अगले 1-2 क्वार्टर इन मामलों पर स्पष्टता लाने के लिए बहुत अहम रहेंगे।