एग्रीटेक प्लेटफॉर्म Arya.ag ने हिमाचल प्रदेश के सेब कारोबार में कदम रखा है। कंपनी कोल्ड स्टोरेज और ग्रेडिंग टेक्नोलॉजी के जरिए सप्लाई चेन को दुरुस्त करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, लेकिन **2026** की फसल में **40%** की भारी गिरावट उनके लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
एग्रीटेक कंपनी Arya.ag, जो अब तक मुख्य रूप से अनाज व्यापार और स्टोरेज के लिए जानी जाती थी, अब बागवानी (Horticulture) क्षेत्र में उतर गई है। कंपनी का फोकस हिमाचल प्रदेश के प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों जैसे किन्नौर, नारकंडा, रोहड़ू, कोटखाई और जुब्बल में इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने पर है। कंपनी का मकसद अपनी टेक्नोलॉजी-बेस्ड लॉजिस्टिक्स के जरिए सेब जैसे जल्दी खराब होने वाले फल की सप्लाई चेन को बेहतर बनाना है।
उत्पादन में भारी कमी का दबाव
हिमाचल में इस बार बागवानी सेक्टर काफी तनाव में है। इंडस्ट्री डेटा के मुताबिक, 2026 में सेब का कुल उत्पादन केवल 4.36 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछली बार के मुकाबले 40% कम है। खराब मौसम और कम बर्फबारी के चलते सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। ऐसी स्थिति में Arya.ag अब 'कंट्रोल्ड-एटमॉस्फेयर' स्टोरेज का इस्तेमाल करेगी ताकि बाजार में माल की आवक को धीरे-धीरे कंट्रोल किया जा सके और कीमतें स्थिर बनी रहें।
अनाज से फलों की ओर शिफ्ट
निवेशकों के नजरिए से देखें, तो अनाज के मुकाबले फल का बिजनेस बिल्कुल अलग है। अनाज काफी समय तक सुरक्षित रहता है, जबकि सेब जैसे फल तुरंत खराब हो जाते हैं। इसके लिए कंपनी ने ऑर्चर्ड्स (orchards) के पास ग्रेडिंग स्कैनर्स लगाए हैं, जो पलक झपकते ही फल की क्वालिटी बता देते हैं। इससे तुड़ाई और स्टोरेज के बीच का समय काफी कम हो जाएगा।
फाइनेंस का नया मॉडल
पारंपरिक मंडी सिस्टम में किसानों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसे हल करने के लिए Arya.ag एक 'कमोडिटी-बैक्ड फाइनेंस' मॉडल लाई है। इसके जरिए ट्रेडर्स और प्रोसेसर्स अपनी ग्रेड की हुई इन्वेंट्री को गिरवी रखकर पूंजी जुटा सकते हैं, जिससे किसानों को समय पर पेमेंट मिल सके।
जोखिम और चुनौतियां
प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे नितिन कुमार लाल श्रीवास्तव के लिए राह आसान नहीं होगी। फसल में 40% की गिरावट का मतलब है कि कंपनी के पास प्रोसेस करने के लिए कम माल होगा, जिससे कंपनी के फिक्स्ड खर्च और मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी इस कम उत्पादन वाले साल में अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को कैसे बनाए रखती है और क्या उसका बिजनेस मॉडल इस भारी उठापटक को झेल पाएगा।
