आंध्र प्रदेश सरकार 2 अक्टूबर को मदनपल्ले में **₹1,00,000 करोड़** के हॉर्टिकल्चर हब की शुरुआत करने जा रही है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य 6 जिलों में खेती को आधुनिक बनाना है, जिसमें **₹40,000 करोड़** केंद्र सरकार की 'पूर्वोदय स्कीम' से और **₹60,000 करोड़** प्राइवेट निवेश से आएंगे।
2 अक्टूबर, 2026 को आंध्र प्रदेश सरकार केंद्रीय सहयोग के साथ मदनपल्ले में इस विशाल हॉर्टिकल्चर हब का शुभारंभ करेगी। यह प्रोजेक्ट विशेष रूप से रायलसीमा क्षेत्र, प्रकाशम और नेल्लोर जिलों पर केंद्रित है, जहाँ पानी की कमी और आर्थिक चुनौतियां लंबे समय से बनी हुई हैं। सरकार का उद्देश्य पारंपरिक खेती को औद्योगिक स्तर की हाई-वैल्यू क्रॉप प्रोडक्शन में बदलना है।
फंडिंग और स्ट्रैटेजी
इस प्रोजेक्ट के लिए कुल ₹1,00,000 करोड़ का निवेश तय किया गया है। इसमें ₹40,000 करोड़ की राशि 'पूर्वोदय स्कीम' के जरिए केंद्र सरकार देगी, जबकि ₹60,000 करोड़ प्राइवेट सेक्टर के निवेशकों से जुटाए जाएंगे। यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल भारत के कृषि सेक्टर के लिए एक बड़ा टेस्ट केस साबित हो सकता है।
इस हब का मुख्य हिस्सा 'इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर' होगा, जिसे Reliance Industries का समर्थन प्राप्त है। यह संस्थान R&D सेंटर के रूप में काम करेगा, ताकि किसानों को आधुनिक तकनीक और इंटरनेशनल मार्केट स्टैंडर्ड्स तक पहुंच मिल सके।
इन्वेस्टर्स के लिए क्या है खास?
निवेशकों के लिए यह प्रोजेक्ट केवल खेती तक सीमित नहीं है। कृषि-आधारित बुनियादी ढांचे के निर्माण से कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में भारी मांग पैदा होने की संभावना है। यदि यह सप्लाई चेन मॉडल सफल रहता है, तो एग्री-लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
हालांकि, इतने बड़े प्रोजेक्ट में एग्जीक्यूशन रिस्क भी हैं। लैंड एक्विजिशन (जमीन अधिग्रहण) और रेग्युलेटरी मंजूरियों में देरी के अलावा, लगातार प्राइवेट निवेश का बना रहना भी इस प्रोजेक्ट की सफलता के लिए अनिवार्य होगा। निवेशकों को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की टाइमलाइन और प्राइवेट कैपिटल की गति पर नजर रखनी चाहिए।
