आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बड़ा ऐलान किया है। राज्य में सूखे से प्रभावित जिलों को सिंचाई और पीने का पानी पहुंचाने वाला पूल सुब्बैया वेलिगोंडा प्रोजेक्ट का पहला फेज 31 अगस्त, 2026 को लॉन्च होगा। यह एक सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसका इस क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा।
मिशन वेलिगोंडा: सिंचाई का नया सवेरा
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने एक अहम घोषणा की है। राज्य के प्रकाशम, नेल्लोर और कडपा जिलों के सूखाग्रस्त इलाकों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला पूल सुब्बैया वेलिगोंडा प्रोजेक्ट का पहला फेज 31 अगस्त, 2026 को विधिवत रूप से शुरू हो जाएगा। यह परियोजना इन क्षेत्रों में सिंचाई और पीने योग्य पानी की उपलब्धता को सुनिश्चित करेगी।
प्रोजेक्ट का दायरा और आर्थिक प्रभाव
यह एक बड़ी सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर पहल है, जिसका मकसद कृष्णा नदी के अतिरिक्त पानी को डायवर्ट करना है। प्रोजेक्ट के पहले चरण से 1.19 लाख एकड़ जमीन की सिंचाई होने की उम्मीद है और करीब 4 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा। राज्य सरकार ने इस चरण को पूरा करने के लिए पिछले दो सालों में लगभग ₹2,250 करोड़ का भारी निवेश किया है। इस प्रोजेक्ट का एक अहम हिस्सा नल्लामाला सागर जलाशय को भरना भी है, जिसके लिए अधिकारी आगामी समारोह में 10.7 TMC पानी छोड़े जाने की योजना बना रहे हैं।
यह प्रोजेक्ट राज्य के अंदरूनी जिलों में जल सुरक्षा को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सरकार ने प्रोजेक्ट के रास्ते की बाधाओं को दूर करने के लिए 6,000 से अधिक परिवारों को ₹768 करोड़ का पुनर्वास और विस्थापन मुआवजा भी बांटा है।
प्रोजेक्ट का पूरा सच
यह समझना महत्वपूर्ण है कि वेलिगोंडा प्रोजेक्ट राज्य सरकार द्वारा प्रबंधित एक सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, न कि कोई पब्लिक लिमिटेड कंपनी। इसलिए, इसके शेयर मूल्य या एक्सचेंज फाइलिंग से संबंधित कोई खबर नहीं है।
हालांकि, इसका उद्घाटन एक बड़ा कदम है, इस प्रोजेक्ट का एक लंबा और चुनौतीपूर्ण इतिहास रहा है। यह प्रोजेक्ट पहली बार 1996 में सोचा गया था, और दशकों से भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और बजट की बार-बार समीक्षा जैसी जटिलताओं के कारण इसकी प्रगति धीमी रही है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की पिछली रिपोर्टों में भी ऐतिहासिक योजना और निष्पादन प्रक्रियाओं को लेकर चिंताएं जताई गई थीं, जिसके चलते समय और लागत दोनों में बढ़ोतरी हुई।
भविष्य की राह
आगे चलकर, प्रोजेक्ट की सफलता निरंतर जल प्रबंधन पर निर्भर करेगी। सिंचाई के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कृष्णा नदी से समय पर और पर्याप्त पानी की आवक महत्वपूर्ण होगी। अधिकारी इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि राज्य संचालन चरण का प्रबंधन कैसे करता है और पानी का डायवर्जन लक्षित जलाशयों तक कैसे पहुंचता है। दूसरे चरण, जिसका लक्ष्य 3.283 लाख एकड़ को कवर करना है, की समय-सीमा को लेकर कोई भी भविष्य के अपडेट क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख संकेत होंगे।
