आंध्रा प्रदेश में मॉनसून की बेरुखी से बड़ा कृषि संकट खड़ा हो गया है। जून से अब तक राज्य में **54.2%** कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खरीफ बुवाई का लक्ष्य महज **74%** तक ही सिमट कर रह गया है।
फसलों की स्थिति और जलाशयों का संकट
आंकड़े बताते हैं कि राज्य में कुल 26.50 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो पाई है, जो उम्मीद से काफी कम है। करीब 2.4 लाख हेक्टेयर से ज्यादा फसलें नमी की भारी कमी (Moisture stress) से जूझ रही हैं, जिसमें धान, कपास और मूंगफली की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। जलाशयों की बात करें तो पेन्नार बेसिन के सोमसीला (Somasila) और कंडालेरू (Kandaleru) जैसे डैम में पानी का स्तर ऐतिहासिक औसत से नीचे है, जिससे सिंचाई के लिए कोई बफर स्टॉक नहीं बचा है।
इकोनॉमी पर असर (Economic Impact)
आंध्रा की करीब 62% आबादी कृषि पर निर्भर है। इस सूखे का सीधा असर ग्रामीण आय पर पड़ेगा, जिससे मार्केट में कंजम्पशन डिमांड कम होने का रिस्क बढ़ गया है। निवेशकों को यह ध्यान रखने की जरूरत है कि अगर फसलें खराब होती हैं, तो इसका सीधा असर FMCG, फर्टिलाइजर और एग्री-मशीनरी कंपनियों के सेल्स वॉल्यूम पर पड़ सकता है। फिलहाल बाजार की नजरें सरकारी राहत पैकेज और सिंचाई सहायता पर टिकी हैं, जो आने वाले क्वार्टर्स में राज्य की इकोनॉमी की दिशा तय करेंगे।
