ग्राउंड-लेवल पर टेक्नोलॉजी का असर
भारत के डेयरी सेक्टर में लीडर Amul ने 'Sarlaben' नाम से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-ड्रिवन डिजिटल असिस्टेंट पेश करके टेक्नोलॉजी में एक बड़ा कदम उठाया है। यह पहल गुजरात के हजारों गांवों में किसानों को सीधे तौर पर लगातार और पर्सनलाइज्ड सपोर्ट देकर डेयरी फार्मिंग में क्रांति लाने के लिए तैयार है। यह असिस्टेंट चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगा और जमीनी स्तर पर जानकारी की कमी को दूर करेगा।
इंटीग्रेटेड सपोर्ट सिस्टम
'Sarlaben' Amul के मौजूदा टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम (AMCS) और पशुधन एप्लीकेशन (Pashudhan application) शामिल हैं, के साथ आसानी से इंटीग्रेट (integrate) हो जाता है। इस इंटीग्रेशन से AI कैटल हेल्थ मैनेजमेंट (cattle health management), जैसे कि सही वैक्सीनेशन शेड्यूल, ज़रूरी मेडिकल ट्रीटमेंट्स, प्रभावी फीडिंग स्ट्रैटेजीज़ और ब्रीडिंग प्रैक्टिस (breeding practices) जैसे महत्वपूर्ण एरियाज़ पर पर्सनलाइज्ड सलाह दे सकेगा। इसके अलावा, यह सरकारी स्कीम्स (government schemes) और उपलब्ध सब्सिडीज़ (subsidies) से जुड़ी ज़रूरी जानकारी भी देगा, जिससे किसानों को कम्पलीट जानकारी मिलेगी।
एक्सेसिबिलिटी और डेटा का आधार
यह AI असिस्टेंट Amul Farmer मोबाइल ऐप के ज़रिए एक्सेसिबल (accessible) होगा, जिसे 10 लाख से ज़्यादा यूज़र्स पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं। फीचर फोन या लैंडलाइन रखने वाले किसानों के लिए, गुजराती में वॉयस कॉल्स (voice calls) के ज़रिए इंटरैक्शन (interaction) सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे इसकी पहुंच आसान होगी। गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) के मैनेजिंग डायरेक्टर (managing director), जयएन मेहता ने इस बात पर ज़ोर दिया कि 'Sarlaben' पांच दशक के स्ट्रक्चर्ड डेटा का इस्तेमाल करता है। यह प्लेटफॉर्म की कैपेबिलिटी को बढ़ाता है, जिससे वेरिफाइड जानकारी मिल सके और समय पर ऐसे फैसले लिए जा सकें जो एनिमल प्रोडक्टिविटी और फार्मर इनकम (farmer income) को बढ़ाएं। यह पहल टेक्नोलॉजी के ज़रिए महिला दूध उत्पादकों को सशक्त बनाने के राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ अलाइन (align) करती है।
दशकों के डेटा का इस्तेमाल
इस प्लेटफॉर्म की इंटेलिजेंस (intelligence) एक बड़े कोऑपरेटिव आईटी इकोसिस्टम (cooperative IT ecosystem) पर बनी है, जो Amul के पांच दशक से ज़्यादा के ऑपरेशनल डेटा का इस्तेमाल करती है। इसमें मिल्क प्रोक्योरमेंट ट्रांजैक्शंस (milk procurement transactions), लाखों कैटल पर दिए गए वेटरनरी ट्रीटमेंट्स (veterinary treatments) और अनगिनत आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन (artificial insemination) रिकॉर्ड्स का एक विशाल भंडार शामिल है। सैटेलाइट इमेजरी (satellite imagery) से फॉडर प्रोडक्शन (fodder production) और रेगुलर कैटल सेंसस (cattle census) से जुड़े डेटा भी AI की ट्रेनिंग बेस को और बेहतर बनाते हैं। यह सब मिलकर सटीक, फार्मर-स्पेसिफिक गाइडेंस (farmer-specific guidance) देना संभव बनाता है और भारत के कोऑपरेटिव डेयरी मूवमेंट के लिए एक नए युग की शुरुआत करता है।