सिंगापुर की एग्रीटेक कंपनी Rize ने अपने सस्टेनेबल चावल की खेती वाले प्लेटफॉर्म का विस्तार करने के लिए इक्विटी और कर्ज के ज़रिए **$31 मिलियन** जुटाए हैं। कंपनी का मुख्य ध्यान दक्षिण पूर्व एशिया पर है, लेकिन वह भारत में एंट्री की संभावनाओं का भी मूल्यांकन कर रही है, जहां उसे फसल की किस्मों और क्षेत्रीय निर्यात मांग जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
Rize ने सीरीज B फंडिंग में हासिल किए $31 मिलियन
सिंगापुर स्थित एग्रीटेक कंपनी Rize ने $31 मिलियन की सीरीज B फंडिंग राउंड सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह पूंजी निवेश वेंचर कैपिटल (VC) के माहौल में एक बड़ी उपलब्धि है। इस फंडिंग में $20 मिलियन की इक्विटी शामिल है, जिसका नेतृत्व BNP Paribas Asset Management Alts, Temasek, Rockefeller Foundation और Breakthrough Energy Ventures जैसे निवेशकों ने किया। इसके अलावा, कंपनी ने United Overseas Bank और Bank for Investment and Development of Vietnam जैसे बैंकों से $11 मिलियन का कर्ज भी हासिल किया है।
बिजनेस मॉडल और मार्केट स्ट्रेटेजी
Rize का बिजनेस मॉडल चावल की खेती को डीकार्बोनाइज करने पर केंद्रित है। कंपनी किसानों को 150 दिनों के ब्याज-मुक्त क्रेडिट के साथ बीज और उर्वरक जैसे जरूरी कृषि इनपुट प्रदान करती है। थोक में इन आपूर्तियों को खरीदकर, Rize किसानों को बेचकर मार्जिन पर मुनाफा कमाती है। जुटाई गई नई धनराशि का उपयोग वियतनाम और इंडोनेशिया में अपनी उपस्थिति बढ़ाने, एग्रोनोमिस्ट के लिए AI-संचालित टूल को बेहतर बनाने और कार्बन सर्टिफिकेशन रिपोर्टिंग क्षमताओं को उन्नत करने के लिए किया जाएगा।
भारत में एंट्री की चुनौतियाँ
हालांकि कंपनी भारत में संभावित प्रवेश का मूल्यांकन कर रही है, यह प्रक्रिया अभी आकलन के चरण में है। CEO ध्रुव सहनी ने चावल की किस्मों में अंतर जैसी कृषि संबंधी बाधाओं का जिक्र किया। भारत की मुख्य निर्यात किस्म, बासमती, मुख्य रूप से उत्तरी क्षेत्रों में उगाई जाती है। दूसरी ओर, कंपनी दक्षिणी भारत में एक पायलट प्रोजेक्ट पर विचार कर रही है, जहां सोना मसूरी प्रमुख किस्म है। सोना मसूरी की बासमती की तुलना में निर्यात क्षमता कम होने के कारण, कंपनी को अपनी भारतीय ऑपरेशंस की लाभप्रदता पर इसके प्रभाव का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करना होगा।
सेक्टर और निवेश का माहौल
इस क्षेत्र में एग्रीटेक को 2024 में इंडोनेशियाई स्टार्टअप eFishery के पतन के बाद अधिक जांच का सामना करना पड़ा है, जो वित्तीय कदाचार से जुड़ा था। इस घटना ने निवेशकों को जलवायु और कृषि प्रौद्योगिकी वेंचर्स के लिए फंडिंग के प्रति अधिक सतर्क बना दिया है। भारतीय बाजार के लिए, कंपनी ने नोट किया है कि इस क्षेत्र में स्थानीय वेंचर कैपिटल की रुचि चुनिंदा रही है, जो अक्सर जलवायु-केंद्रित एग्रीटेक बिजनेस मॉडल की स्केलेबिलिटी और रिटर्न उत्पन्न करने के लिए आवश्यक समय-सीमा के आसपास की चिंताओं के कारण होती है।
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि Rize ने भारत में तत्काल लॉन्च के लिए कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है। भविष्य के अपडेट संभवतः इस बात पर केंद्रित होंगे कि कंपनी अपनी परिचालन योजनाओं की पुष्टि करती है या नहीं, वह अपने क्रेडिट-आधारित बिजनेस मॉडल को भारतीय बैंकिंग और भूमि-जोत परिदृश्य के अनुकूल कैसे बनाती है, और क्या वह विशिष्ट स्थानीय फसल किस्मों से जुड़ी लाभप्रदता की चुनौतियों को दूर कर सकती है।
