केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने PMDDKY स्कीम के तहत 100 जिलों को अब सीधे उत्पादन (Productivity) पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए हैं। योजना की पहली वर्षगांठ पर जोर अब सिस्टम बनाने के बजाय ठोस कृषि परिणामों पर है।
कृषि मंत्रालय ने 'प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना' (PMDDKY) की पहली वर्षगांठ पर एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कर दिया है कि अब समय प्रशासनिक ढांचा खड़ा करने का नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाली प्रगति का है। उन 100 जिलों पर विशेष फोकस है, जहां फसल उत्पादकता और क्रेडिट की पहुंच हमेशा से एक चुनौती रही है।
सरकारी डेटा का क्या कहना है?
यह योजना 36 केंद्रीय कार्यक्रमों को मिलाकर चलाई जा रही है, जिसका सालाना बजट ₹24,000 करोड़ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन जिलों का परफॉर्मेंस स्कोर अप्रैल 2026 में 22.54 था, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 46.89 पर पहुंच गया है। मंत्रालय अब यह देख रहा है कि कैसे टॉप प्रदर्शन करने वाले जिलों और पिछड़े जिलों के बीच के अंतर को कम किया जाए।
नया अभियान 'खेत बचाओ'
ग्रामीण सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए सरकार 22 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक 'खेत बचाओ अभियान' शुरू करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य मिट्टी की सेहत सुधारना और फर्टिलाइजर का सही उपयोग सुनिश्चित करना है। यह कदम ग्रामीण डिमांड और लॉन्ग-टर्म फार्म इनकम के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए जोखिम
निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या यह जवाबदेही (Accountability) वाकई फसल की तीव्रता को बढ़ा पाएगी। हालांकि, राज्य स्तर पर नीतियों के असंगत क्रियान्वयन और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय में आ रही अड़चनें अब भी एक बड़ा रिस्क बनी हुई हैं।
