निर्यात प्रोत्साहन पर नई पॉलिसी: बजटीय कटौती और चुनिंदा राहत
सरकार के इस फैसले से भारतीय निर्यात के लिए एक नई दिशा तय हो गई है। RoDTEP स्कीम, जिसका मकसद निर्यातकों को उनके एक्सपोर्ट पर लगे इम्पोर्ट ड्यूटी और टैक्स की भरपाई करना है, उसके बजट को FY27 के लिए 45% घटाकर ₹10,000 करोड़ कर दिया गया है, जबकि FY26 में यह ₹18,233 करोड़ था। इस बड़ी कटौती के कारण, Directorate General of Foreign Trade (DGFT) ने साफ कर दिया है कि ज्यादातर सेक्टर्स के लिए RoDTEP के तहत मिलने वाले इंसेंटिव्स को 50% तक सीमित कर दिया जाएगा।
किसानों और पशुपालकों को क्यों मिली छूट?
आंकड़े बताते हैं कि इस स्कीम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कृषि और पशु उत्पादों के निर्यातकों ने किया है। FY23 में, RoDTEP के तहत कुल ₹13,020 करोड़ बांटे गए थे, जिसमें से लगभग एक-तिहाई (one-third) इन्हीं सेक्टर्स को मिले थे। खास तौर पर, लाइव एनिमल प्रोडक्ट्स (पशु उत्पाद) को ₹1,291 करोड़ (लगभग 9.9%) और वेजिटेबल प्रोडक्ट्स (वनस्पति उत्पाद) को ₹2,172 करोड़ (लगभग 16.7%) का फायदा हुआ। इसी भारी उपयोगिता और इनके एक्सपोर्ट की अहमियत को देखते हुए, सरकार ने इन महत्वपूर्ण सेक्टर्स को नई कटौती से बाहर रखने का फैसला किया है।
रणनीतिक बदलाव और बाकी सेक्टर्स पर असर
यह कदम निर्यात प्रोत्साहन में सरकार की नई रणनीति को दर्शाता है, जहां अब उन सेक्टर्स को प्राथमिकता दी जा रही है जो ग्लोबल मार्केट में मजबूत हैं और स्कीम का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि मशीनरी और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट जैसे सेक्टर्स को 14.4% और टेक्सटाइल्स को 15.1% RoDTEP का फायदा मिलता रहा है, अब उन्हें भी इंसेंटिव कटौती का सामना करना पड़ेगा। RoDTEP स्कीम को 2021 में Merchandise Exports from India Scheme (MEIS) की जगह लाया गया था ताकि यह World Trade Organization (WTO) के नियमों के अनुरूप हो और एक ज्यादा व्यवस्थित प्रोत्साहन प्रणाली बन सके।
आगे की राह: चुनौती या अवसर?
हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्सटाइल जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स के लिए यह कटौती चिंता का सबब बन सकती है। इंसेंटिव्स कम होने से उनकी मार्जिन पर दबाव आ सकता है और वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में दूसरी देशों की तुलना में कम प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं। MSMEs (छोटे और मध्यम उद्योग) पर इसका ज्यादा असर पड़ने की आशंका है। इस बदलाव के बीच, निर्यातकों को अपनी दक्षता बढ़ाने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और नए ट्रेड एग्रीमेंट पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होगी, ताकि वे सरकारी सब्सिडी पर कम निर्भर रहें।