मुनाफे पर दबाव, रेवेन्यू में उछाल
AWL Agri Business को Q3 FY26 में रेवेन्यू तो 10.5% बढ़कर ₹18,603 करोड़ (पिछले साल ₹16,839 करोड़) पहुंचाने में कामयाबी मिली, लेकिन इनपुट कॉस्ट में हुए भारी उतार-चढ़ाव और जारी निवेश के चलते कंपनी का नेट प्रॉफिट 34.5% लुढ़ककर ₹269 करोड़ पर आ गया। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने ₹411 करोड़ का मुनाफा कमाया था। EBITDA में भी 20.16% की गिरावट आई, जो ₹685 करोड़ रहा। यह सीधा इशारा है कि कंपनी के मार्जिन पर काफी दबाव बना हुआ है।
नौ महीने के नतीजे और EPS
फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले नौ महीनों (9MFY26) में, कंपनी का रेवेन्यू 17.2% बढ़कर ₹53,266 करोड़ हो गया, लेकिन नेट प्रॉफिट 27.4% की गिरावट के साथ ₹752 करोड़ पर आ गया। इस तिमाही के लिए कंपनी का डाइल्यूटेड EPS ₹2.08 रहा, जो पिछले साल ₹3.16 था।
एडिबल ऑयल सेक्टर की चुनौतियाँ
AWL Agri Edible Oils सेक्टर की कई मुश्किलों से जूझ रही है। भारत अपनी खाने के तेल की 55% से ज्यादा की मांग आयात से पूरी करता है, जिससे ग्लोबल सप्लाई और कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर कंपनियों पर पड़ता है। सरकार के इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने के कारण किसान तेलबीज की बजाय मक्का उगाने की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे आयात पर निर्भरता और दाम बढ़ने का खतरा और बढ़ गया है।
ब्रोकरेज की राय और शेयर का प्रदर्शन
इन सब चिंताओं के बावजूद, ब्रोकरेज हाउस ICICI Securities इस शेयर पर 'Buy' रेटिंग और ₹300 का टारगेट प्राइस बनाए हुए है। उन्हें उम्मीद है कि पाम ऑयल की कीमतें सामान्य होने और affordability बढ़ने से कंपनी की वॉल्यूम और मिक्स में रिकवरी आएगी। हालांकि, कंपनी के हालिया नतीजों से साफ है कि फिलहाल मुनाफे पर दबाव है। पिछले एक साल में AWL Agri के शेयर ने निवेशकों को निराश किया है, जो 20% से ज्यादा गिर चुका है।
प्रतिस्पर्धी और भविष्य की राह
अगर हम प्रतिस्पर्धियों की बात करें, तो Patanjali Foods का मार्केट कैप लगभग ₹55,000 करोड़ है, जबकि AWL Agri का मार्केट कैप करीब ₹27,000-₹28,000 करोड़ है। Gokul Agro Resources जैसे छोटे प्लेयर का P/E भी AWL Agri (जो 20-30 के P/E पर ट्रेड कर रहा है) से कम है। कंपनी का ROE पिछले तीन सालों से कम रहा है और प्रमोटर होल्डिंग में भी कमी आई है। Wilmar International अब कंपनी में मेजॉरिटी शेयरहोल्डर है। AWL Agri के लिए रिकवरी का रास्ता फूड बिजनेस में एग्जीक्यूशन, पाम ऑयल वॉल्यूम को स्थिर करने और इनपुट कॉस्ट को मैनेज करने पर टिका है। एनालिस्ट्स के टारगेट प्राइस में तेजी की उम्मीद है, लेकिन शेयर के हालिया प्रदर्शन और सेक्टर की मुश्किलों को देखते हुए करीबी निगरानी की जरूरत है।
