कर्नाटक के आमों की पहली खेप मालदीव पहुंची! APEDA की नई पहल से किसानों की बढ़ी कमाई

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AuthorNeha Patil|Published at:
कर्नाटक के आमों की पहली खेप मालदीव पहुंची! APEDA की नई पहल से किसानों की बढ़ी कमाई

भारत ने मालदीव को **1 मीट्रिक टन** नीलम और तोतापुरी आमों की पहली खेप भेजी है। यह कदम किसानों के लिए निर्यात सीजन बढ़ाने और उनकी कमाई को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

किसानों की आय बढ़ाने की नई राह

एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) ने कर्नाटक से मालदीव के लिए आमों की पहली एयर कार्गो खेप सफलतापूर्वक भेजी है। 30 जुलाई 2026 को रवाना हुए 1 मीट्रिक टन के इस कंसाइनमेंट में नीलम और तोतापुरी किस्म के आम शामिल थे। इस पहल का मकसद अप्रैल-मई के पीक सीजन के बाद भी भारतीय आमों के निर्यात को जारी रखना है।

कर्नाटक के कोलर जिले से हुई सोर्सिंग

यह खेप कर्नाटक के कोलर जिले से Prakruthimaya Farmers Producer Company Ltd. के ज़रिए मंगाई गई थी। देर से पकने वाले इन आमों को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में भेजने से किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। पीक सीजन में जब मंडियों में आमों की सप्लाई बहुत ज़्यादा होती है, तो दाम गिर जाते हैं। लेकिन जुलाई के आखिर में इन किस्मों के लिए निर्यात के नए रास्ते खोलकर, APEDA का लक्ष्य स्थानीय बाज़ार पर दबाव कम करना और किसानों को उनकी मेहनत का ज़्यादा मूल्य दिलाना है।

निर्यात के लिए चुनी गईं खास किस्में

नीलम और तोतापुरी आमों को उनकी मज़बूती और बहुमुखी प्रतिभा के कारण चुना गया है, जो एयर कार्गो के लिए बहुत ज़रूरी है। नीलम किस्म अपने ज़्यादा शुगर कंटेंट और खुशबू के लिए जानी जाती है, जो इसे फूड प्रोसेसिंग और बेवरेज इंडस्ट्री के लिए बेहतर बनाती है। वहीं, तोतापुरी अपनी खास शक्ल और खट्टे-मीठे स्वाद के लिए मशहूर है और इसका इस्तेमाल जूस और कॉन्संट्रेट बनाने में खूब होता है। इन किस्मों को निर्यात के ज़रिए उपलब्ध कराकर, भारतीय उत्पादक मालदीव जैसे बाज़ारों की मांग को पूरा कर सकते हैं।

नए उद्यमियों की भूमिका

यह निर्यात पहल भारतीय एग्री-एक्सपोर्ट सेक्टर की बदलती तस्वीर को भी दिखाती है। इस खेप को Ahalya Devi Ventures ने सुगम बनाया, जिसका नेतृत्व एक नई महिला उद्यमी कर रही हैं। छोटे, क्षेत्रीय फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों (FPCs) का औपचारिक निर्यात सप्लाई चेन में शामिल होना निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु है। FPCs की बढ़ती भागीदारी से सीधे बाज़ार तक पहुंचने के बेहतर मौके मिलेंगे और बिचौलियों की कई परतों को हटाकर किसानों को ज़्यादा मुनाफ़ा हो सकता है।

एग्री-एक्सपोर्ट्स के लिए भविष्य की राह

इस पहल की लंबी अवधि की सफलता सप्लाई चेन की निरंतरता और एयर ट्रांसपोर्ट के लिए क्वालिटी स्टैंडर्ड बनाए रखने पर निर्भर करेगी। निवेशक और एग्रीकल्चर एनालिस्ट्स इस बात पर नज़र रखेंगे कि APEDA इन खास निर्यात मार्गों को मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया के अन्य देशों तक कैसे बढ़ा पाता है। एयर फ्रेट की लागत, जो अक्सर खराब होने वाले सामानों के निर्यात की मुनाफ़ेबाजी तय करती है, और FPCs की अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों की कड़ी क्वालिटी और फाइटोसैनिटरी ज़रूरतों को लंबे समय तक पूरा करने की क्षमता, ये कुछ मुख्य बिंदु होंगे जिन पर ध्यान देना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.