ArcelorMittal Nippon Steel (AMNS) India ने ICAR-IARI के साथ मिलकर एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस 5 साल की मुहिम में आयरन ओर टेलिंग्स (खनन कचरे) को खेती के लिए उपयोगी खाद में बदला जाएगा, जिससे सिंथेटिक फर्टिलाइजर पर निर्भरता **20%** तक कम हो सकती है।
वेस्ट से बेस्ट बनाने की कवायद
आयरन ओर के खनन के बाद जो बारीक कचरा बचता है, जिसे 'टेलिंग्स' कहते हैं, उसे अब तक केवल औद्योगिक कचरा माना जाता था। लेकिन अब ICAR-IARI और AMNS India ने इसे एग्रीकल्चरल इनपुट में बदलने का फैसला किया है। यह कदम न केवल स्टील सेक्टर के ESG लक्ष्यों को पूरा करेगा, बल्कि मिट्टी की पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में भी मददगार साबित होगा।
कैसे काम करेगी तकनीक?
विशेषज्ञों की टीम ने इस कचरे की 6 अलग-अलग बैच में टेस्टिंग की है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसमें कोई जहरीली धातु (toxic heavy metals) न हो। इस प्रक्रिया में बैक्टीरिया और फंगी (biological consortia) का उपयोग किया जा रहा है, जो खनिजों को पौधों के लिए अवशोषित करने योग्य रूप में बदल देते हैं। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इससे फसल की पैदावार में 10-15% तक की बढ़ोतरी संभव है।
भविष्य की राह
यह प्रोजेक्ट 2029 तक चलेगा। फिलहाल छत्तीसगढ़ में छोटे स्तर पर टेस्टिंग के बाद इसे बड़े फील्ड ट्रायल्स के लिए ICAR-IARI की सुविधाओं में ले जाया जाएगा। सुरक्षा और फूड सेफ्टी के लिहाज से मिट्टी पर इसके असर की लंबी निगरानी की जाएगी। यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो भारत के माइनिंग सेक्टर के लिए यह कचरा प्रबंधन का एक नया और क्रांतिकारी मॉडल बन सकता है।
