Agri-Finance: AI और Satellite तकनीक से बदल रही किसानों की तकदीर, पर मौसम की मार बनी चुनौती

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Agri-Finance: AI और Satellite तकनीक से बदल रही किसानों की तकदीर, पर मौसम की मार बनी चुनौती

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सैटेलाइट इमेजरी अब भारतीय कृषि क्षेत्र में कर्ज देने के तरीकों को पूरी तरह बदल रही है। इससे किसानों को क्रेडिट मिलना आसान हो रहा है, हालांकि 2026 के खरीफ सीजन में खराब मौसम की चुनौती सेक्टर पर भारी पड़ सकती है।

भारत के कृषि फाइनेंसिंग सेक्टर में एक बड़ा डिजिटल बदलाव देखा जा रहा है। अब बैंक और लेंडर्स पुरानी कागजी प्रक्रिया को छोड़कर डेटा-ड्रिवन मॉडल अपना रहे हैं। AI और सैटेलाइट की मदद से अब फसलों की सही स्थिति और रिस्क का सटीक अंदाजा लगाना संभव हो गया है।

फार्मर स्कोरकार्ड से आसान हुआ लोन

ग्रामीण क्षेत्र में लोन न मिल पाने की सबसे बड़ी वजह डेटा की कमी थी। अब नई तकनीकों से 'फार्मर स्कोरकार्ड' तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें फसल का पुराना डेटा और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड शामिल होता है। इससे वेयरहाउस रिसिप्ट फाइनेंसिंग को भी बढ़ावा मिल रहा है, जिससे किसान फसल कटते ही कम दाम पर बेचने के बजाय वेयरहाउस में स्टोर कर उस पर लोन ले सकते हैं।

सरकारी और निजी कोशिशें

StarAgri जैसी कंपनियां डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए सप्लाई चेन को बेहतर बना रही हैं। वहीं, सरकारी स्तर पर 'Bharat-VISTAAR' प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को AI-बेस्ड सलाह और डेटा का लाभ दिया जा रहा है। इससे अनौपचारिक मनी लेंडर्स पर निर्भरता कम हो रही है और किसान औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जुड़ रहे हैं।

रिस्क फैक्टर: 2026 खरीफ सीजन

तकनीक के बावजूद, मौसम की अनिश्चितता एक बड़ा रिस्क बनी हुई है। अनुमान है कि 2026 के खरीफ सीजन में कुल प्रोडक्शन में 5% से 7% की गिरावट आ सकती है। यह गिरावट मानसून के बदलते पैटर्न और स्थानीय मौसमी उतार-चढ़ाव के कारण है, जिसे तकनीक पूरी तरह कंट्रोल नहीं कर सकती। निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि डिजिटल टूल्स का विस्तार कितनी तेजी से छोटे किसानों तक पहुँचता है और वे जलवायु के इस रिस्क को कितना कम कर पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.