केंद्र सरकार के 2026 के नए ड्राफ्ट नियमों पर Aam Aadmi Party ने मोर्चा खोल दिया है। पराली जलाने पर अब ₹30,000 तक का जुर्माना और लैंड रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' दर्ज करने का प्रस्ताव है, जिससे किसानों के लिए लोन लेना मुश्किल हो सकता है।
केंद्र सरकार द्वारा पराली प्रबंधन के लिए लाए गए 2026 के ड्राफ्ट फ्रेमवर्क ने पंजाब में सियासी घमासान छेड़ दिया है। इस ड्राफ्ट में जुर्माने के साथ-साथ लैंड रिकॉर्ड में 15 महीनों के लिए 'रेड एंट्री' करने का प्रावधान है, जो किसानों के बैंकिंग और क्रेडिट सुविधाओं पर सीधा असर डाल सकता है।\n\n### जुर्माने का गणित\nनए नियमों के तहत, सरकार ने जुर्माने का एक टियर सिस्टम बनाया है:\n- 2 एकड़ से कम जमीन पर: ₹5,000\n- 2 से 5 एकड़ के बीच: ₹10,000\n- बड़ी जोत पर: ₹30,000\n\nसबसे बड़ा विवाद 'रेड एंट्री' क्लॉज को लेकर है। जानकारों का कहना है कि अगर जमीन के कागजों में यह एंट्री होती है, तो किसान के लिए बैंक से लोन लेना या जमीन की बिक्री करना कानूनी रूप से पेचीदा हो सकता है।\n\n### क्या है AAP का तर्क?\nAAP का कहना है कि पंजाब ने पहले ही पराली जलाने की घटनाओं में बड़ी गिरावट दर्ज की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में केवल 5,114 घटनाएं सामने आईं, जो 2024 के मुकाबले 53% और 2021 के मुकाबले 93% कम है।\n\nपार्टी का मानना है कि दंड के बजाय सरकार को धान की पराली का एक कमर्शियल मार्केट बनाना चाहिए। अगर सरकार इसे 'वेस्ट' (कचरा) के बजाय एक 'रिसोर्स' (संसाधन) के तौर पर प्रमोट करे, तो किसान इसे बेचने के लिए प्रोत्साहित होंगे। अब देखना यह होगा कि फाइनल पॉलिसी में सरकार मार्केट-बेस्ड इंसेंटिव्स को जगह देती है या केवल सख्ती पर जोर देती है।
