चेन्नई की स्टार्टअप ePlane Company ने 100 किलोमीटर रेंज वाली इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी का प्रोटोटाइप पेश किया है। IIT मद्रास इनक्यूबेशन से निकली यह कंपनी 2028 तक इसे कमर्शियली लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसका ऑपरेटिंग कॉस्ट Uber से करीब 2.5 गुना ज्यादा रखने का लक्ष्य है।
पहली झलक: इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी का प्रोटोटाइप
एविएशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक नया कदम उठाते हुए, चेन्नई की ePlane Company (Ubifly Technologies) ने अपनी इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी का फुल-स्केल प्रोटोटाइप दिखाया है। सात साल की रिसर्च और IIT मद्रास के इनक्यूबेशन में हुए काम का नतीजा, यह कंपनी अब 2028 तक इसे कमर्शियली लॉन्च करने पर फोकस कर रही है।
डिजाइन और क्षमता
यह इलेक्ट्रिक व्हीकल हेलिकॉप्टर की तरह वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (VTOL) करने में सक्षम है। इसका वजन करीब 2,000 किलोग्राम है और इसमें एक पायलट के साथ दो यात्री बैठ सकते हैं। एक बार चार्ज होने पर यह 100 किलोमीटर तक की उड़ान भर सकेगी। कंपनी ने इसमें 'लिफ्ट-प्लस-क्रूज' आर्किटेक्चर का इस्तेमाल किया है, जिसमें कई छोटे मोटर्स लगे हैं। खास बात यह है कि अगर एक मोटर फेल भी हो जाए तो भी यह सुरक्षित उड़ान भरेगी। ePlane का दावा है कि इसका डिजाइन अंतरराष्ट्रीय मॉडलों से ज्यादा कॉम्पैक्ट है, जिसका माप 8x11 मीटर है।
फंडिंग और सपोर्ट
ePlane Company को अपने विस्तार के लिए लगातार फंड मिल रहा है। पब्लिक फाइलिंग के अनुसार, इसे बेंगलुरु की Speciale Invest और IITM Incubation Cell जैसे संस्थागत निवेशकों का साथ मिला है। Shreyas Shibulal जैसे व्यक्तिगत निवेशक भी इसमें पैसा लगा चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी $30 मिलियन के एक फंडिंग राउंड को फाइनल करने की कगार पर है, जिसमें सरकारी इनोवेशन फंड का भी सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। मार्च 2025 तक, को-फाउंडर और CTO सत्य चक्रवर्ती के पास लगभग 30% हिस्सेदारी थी।
कॉम्पिटिशन और मार्केट का फोकस
दुनियाभर में इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (eVTOL) वाहनों के बाजार में EHang (चीन) और Joby Aviation, Archer Aviation (अमेरिका) जैसी कंपनियां पहले से मौजूद हैं। ये कंपनियां सर्टिफिकेशन के अलग-अलग चरणों में हैं। ePlane खुद को खास शहरी मोबिलिटी चुनौतियों के समाधान के तौर पर पेश कर रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सीधे मास-ट्रांजिट सिस्टम से मुकाबला करने के बजाय एयर एम्बुलेंस, इंडस्ट्रियल लॉजिस्टिक्स और डिफेंस जैसे खास कामों के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती है। एयर एम्बुलेंस के तौर पर इसके इस्तेमाल से इमरजेंसी रेस्पोंस टाइम कम होने की उम्मीद है, और इसका अनुमानित मिशन कॉस्ट पारंपरिक हेलिकॉप्टर की तुलना में काफी कम, यानी करीब ₹30,000 होगा।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
प्रोटोटाइप से कमर्शियल सर्विस तक का सफर कई चुनौतियों से भरा है। कंपनी को 2027 के अंत तक फ्लाइट टेस्टिंग पूरी करनी होगी और भारतीय एयरस्पेस में उड़ान के लिए जरूरी रेगुलेटरी सर्टिफिकेशन हासिल करने होंगे। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनी इन टेक्निकल माइलस्टोन्स को कैसे पूरा करती है, एयर एम्बुलेंस सर्विस को कितनी अच्छी तरह इंटीग्रेट करती है, और 2028 के लॉन्च तक अपने ऑपरेशन्स को बनाए रखने के लिए जरूरी फंडिंग कैसे जुटाती है।
