Unimech Aerospace के शेयरों में आज जबरदस्त एक्शन देखने को मिला है। यह स्टॉक **₹1,698** के अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है, जो मार्च के निचले स्तरों से **144%** की शानदार रिकवरी है। कंपनी का ध्यान अब हाई-वैल्यू प्रिसिजन इंजीनियरिंग पर टिका है।
मुनाफे में बढ़त और नई स्ट्रैटेजी
इस शानदार रैली के पीछे कंपनी का बदलता हुआ बिजनेस मॉडल मुख्य वजह है। CareEdge Ratings के अनुसार, कंपनी का EBITDA मार्जिन वित्त वर्ष 2026 में 31% रहा था, जो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में सुधरकर 36.5% पर पहुंच गया। कंपनी अब सब-कॉन्ट्रैक्टर्स पर निर्भर रहने के बजाय अपनी इंजीनियरिंग क्षमताएं खुद विकसित कर रही है। साथ ही, Free Trade Warehousing Zone की मदद से कंपनी इन्वेंट्री और सप्लाई चेन को बेहतर तरीके से मैनेज कर पा रही है।
असेंबली और MRO मार्केट में पैठ
कंपनी ने एयरोस्पेस, न्यूक्लियर और डिफेंस सेक्टर में अपने कदम तेजी से बढ़ाए हैं। अब फोकस केवल पुर्जे सप्लाई करने पर नहीं, बल्कि हाई-वैल्यू 'असेंबली' डिलीवर करने पर है। कंपनी ने हाल ही में Hobel का अधिग्रहण किया है और सऊदी अरब में एक जॉइंट वेंचर शुरू किया है। इसी संभावना को देखते हुए Choice Institutional Equities ने स्टॉक पर बुलिश रुख अपनाते हुए ₹1,950 का टारगेट प्राइस दिया है, क्योंकि ग्लोबल MRO मार्केट 2036 तक $193 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
रिस्क और वैल्युएशन पर नजर
तेजी के बावजूद बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। चूंकि प्रिसिजन इंजीनियरिंग एक कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर है, इसलिए प्रोजेक्ट्स को सही समय पर पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। 6,300 से ज्यादा स्टॉक-कीपिंग यूनिट्स को मैनेज करने वाली इस कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने हालिया अधिग्रहणों (जैसे Hobel) को कितनी स्मूथली इंटीग्रेट करती है और क्या आगे भी ये मार्जिन बरकरार रख पाती है या नहीं। ग्लोबल सप्लाई चेन की अनिश्चितता भी भविष्य की ग्रोथ के लिए एक बड़ा फैक्टर बनी रहेगी।
