राष्ट्रपति Donald Trump ने 28 अगस्त, 2026 को U.S. Space Academy की स्थापना के लिए एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका मकसद U.S. Space Force, NASA और प्राइवेट एयरोस्पेस इंडस्ट्री के लिए कुशल वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की कमी को पूरा करना है।
एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए नई उम्मीद
राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश के तहत एक ऐसा फेडरल संस्थान तैयार किया जाएगा, जो वेस्ट पॉइंट (West Point) और U.S. Naval Academy की तर्ज पर काम करेगा। इसका मुख्य लक्ष्य अंतरिक्ष मिशनों के लिए एस्ट्रोनॉट्स, इंजीनियरों और तकनीशियनों की एक मजबूत पाइपलाइन तैयार करना है।
मिशन की जिम्मेदारी
इस अकादमी की योजना और क्रियान्वयन के लिए एक प्रेसिडेंशियल कमीशन बनाया गया है, जिसकी अध्यक्षता NASA के एडमिनिस्ट्रेटर Jared Isaacman करेंगे। यह कमीशन पाठ्यक्रम, गवर्नेंस और सैन्य-नागरिक ट्रेनिंग के बीच तालमेल तय करेगा।
प्राइवेट सेक्टर को मिलेगा फायदा
निजी क्षेत्र की स्पेस कंपनियां, जो सैटेलाइट और लूनर एक्सप्लोरेशन जैसे कामों में लगी हैं, फिलहाल टैलेंट की भारी कमी से जूझ रही हैं। स्पेशलिस्ट कर्मचारियों की कमी के कारण इन कंपनियों पर सैलरी का भारी दबाव है। यदि यह अकादमी सफल होती है, तो लंबे समय में इन कंपनियों के लिए स्किल्ड ह्यूमन कैपिटल की उपलब्धता बढ़ेगी और भर्ती लागत (Recruitment Cost) को स्थिर करने में मदद मिलेगी।
राह में चुनौतियां
इस योजना के सामने सबसे बड़ी बाधा कांग्रेस से मिलने वाली फेडरल फंडिंग है। किसी भी नए फेडरल संस्थान के लिए निर्माण, स्टाफिंग और ऑपरेशंस हेतु भारी बजट की मंजूरी अनिवार्य है। इतिहास गवाह है कि बड़े प्रोजेक्ट्स पर अक्सर संसद में तीखी बहस होती है, जिससे इस प्रोजेक्ट की समय-सीमा फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है। साथ ही, अकादमी के करिकुलम और एक्सेस पर भी अभी मंथन जारी है कि इसमें कितने प्रतिशत छात्र सैन्य और कितने नागरिक बैकग्राउंड के होंगे।
