ईरान के साथ सैन्य तनाव में अमेरिका का खर्च **$43.6 बिलियन** के पार पहुंच गया है। डिफेंस मिसाइल इंटरसेप्टर्स की लगातार खपत से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है, जो भविष्य में डिफेंस सेक्टर और ग्लोबल सिक्योरिटी के लिए बड़ी चुनौती है।
सितंबर 2026 की शुरुआत तक अमेरिका द्वारा पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ईरान के साथ सैन्य संघर्ष में अब तक $43.6 बिलियन का खर्च हो चुका है। पहले के अनुमानों के मुकाबले यह एक बड़ी उछाल है, जिसमें हर महीने लगभग $3 बिलियन का ऑपरेश्नल खर्च हो रहा है।
हथियारों के खर्च में बेतहाशा बढ़ोतरी
इस खर्च के पीछे सबसे बड़ा कारण अत्याधुनिक हथियारों का तेजी से इस्तेमाल है। केवल हथियारों और गोला-बारूद (Munitions) पर खर्च बढ़कर $28.1 बिलियन हो गया है, जो महज एक महीने पहले $21.7 बिलियन था। $6 बिलियन की यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से Patriot और THAAD मिसाइल सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले डिफेंस इंटरसेप्टर्स की भारी खपत के कारण है। NATO अधिकारियों के मुताबिक, इन डिफेंस सिस्टम्स का स्टॉक अब क्रिटिकल लेवल से नीचे गिर चुका है।
सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर
डिफेंस प्रोडक्शन में आ रही यह बाधा ग्लोबल मार्केट के लिए चिंता का विषय है। डिमांड और सप्लाई के इस असंतुलन के कारण सऊदी अरब जैसे क्षेत्रीय सहयोगी देश अब इमरजेंसी सप्लाई की मांग कर रहे हैं। इससे डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए तो ऑर्डर्स बढ़ रहे हैं, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर भारी दबाव है। पेंटागन के इंस्पेक्टर जनरल की रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों में स्थित कई अमेरिकी सैन्य अड्डों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से नुकसान पहुंचा है।
डिफेंस सेक्टर के लिए संकेत
निवेशकों को एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में आने वाले सरकारी फैसलों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। सप्लाई चेन की बाधाएं प्रोडक्शन टाइमलाइन को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे शेयर बाजार में डिफेंस कंपनियों के स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, जारी संघर्ष ग्लोबल ऑयल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ा रहा है, जो एनर्जी-डिपेंडेंट इकोनॉमीज के लिए एक बड़ा रिस्क फैक्टर बना हुआ है।
