हथियारों के भंडार पर बड़ा संकट
ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका के सैन्य हथियारों का भारी इस्तेमाल हुआ है, जिससे देश के रक्षा उद्योग की कमजोरियां सामने आ गई हैं। हालांकि, सरकार की ओर से रक्षा बजट रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर है, लेकिन असल समस्या पैसों की नहीं, बल्कि समय की है। टॉमहॉक क्रूज मिसाइल, THAAD इंटरसेप्टर और पैट्रियट मिसाइल बैटरी जैसे सिस्टम के स्टॉक को फिर से भरने में 3 से 5 साल का समय लगने का अनुमान है। यह एक बड़ा खतरा है जो पश्चिमी प्रशांत और अन्य विवादित क्षेत्रों में अमेरिका की सैन्य ताकत को कमजोर कर सकता है।
प्रोडक्शन में बड़ी अड़चनें
एक्सपर्ट्स का कहना है कि खास पुर्जों पर निर्भरता ही प्रोडक्शन बढ़ाने में सबसे बड़ी रुकावट है। सॉलिड-रॉकेट मोटर के प्रोडक्शन में इस्तेमाल होने वाले अमोनियम पर्क्लोरेट की सीमित सप्लाई एक बड़ा जोखिम है। RTX कॉर्पोरेशन और लॉकहीड मार्टिन जैसी बड़ी कंपनियों ने अलबामा और एरिज़ोना में बड़े निवेश किए हैं, लेकिन पिछले एक दशक से कम खरीद ऑर्डर की वजह से प्रोडक्शन क्षमता का विस्तार नहीं हो पाया है। कंपनियां ऑटोमेशन और AI का इस्तेमाल करके प्रोडक्शन तेज करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इन हाई-एंड इंटरसेप्टर्स की जटिलता के कारण इसमें तुरंत सुधार संभव नहीं है।
जोखिम और कमजोरियां
निवेशकों के नजरिए से, डिफेंस सेक्टर कई मुश्किलों का सामना कर रहा है। बड़े ऑर्डर के बावजूद, कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना हुआ है। बड़े ठेकेदार सरकार के कड़े नियमों से जूझ रहे हैं, जिससे प्रोजेक्ट में देरी या तकनीकी दिक्कतों के कारण अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, बिखरी हुई सप्लाई चेन एक बड़ा जोखिम है, जहां एक छोटे सप्लायर की विफलता भी प्रोडक्शन को रोक सकती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि रक्षा क्षेत्र के इंडेक्स में पहले से ही संघर्ष का असर दिख रहा है, और प्रोडक्शन टाइमलाइन 2030 तक बढ़ने की उम्मीद है। यदि उत्पादन बढ़ाने में और देरी होती है, तो कंपनियों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
भविष्य का रास्ता
स्टॉक को पूरी तरह से फिर से भरने के लिए मल्टी-ईयर प्रोक्योरमेंट डील (कई सालों के खरीद समझौते) का सफल होना जरूरी है। इससे ठेकेदार अपनी सुविधाओं के आधुनिकीकरण में निवेश कर पाएंगे। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने $1.5 ट्रिलियन के रक्षा बजट का प्रस्ताव दिया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि राजस्व में बढ़ोतरी धीरे-धीरे ही होगी। रक्षा अधिकारी अब सप्लाई चेन में विविधता लाने और सॉलिड-फ्यूल की दिक्कतों को दूर करने के लिए लिक्विड-प्रोपल्शन जैसे विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। आने वाले समय में, इस इंडस्ट्री की सफलता नए कॉन्ट्रैक्ट्स पर नहीं, बल्कि मौजूदा काम को पूरा करने और महंगाई व लॉजिस्टिक दबावों से निपटने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
