US Army अपनी कॉम्बैट ट्रेनिंग में बड़ा बदलाव कर रही है। यूक्रेन युद्ध से मिले अनुभव के बाद सेना ने एक प्रयोगात्मक 'ड्रोन बटालियन' को वापस सामान्य इंफेंट्री भूमिका में बदल दिया है, जो आधुनिकीकरण की गति पर सवाल खड़े कर रहा है।
यूक्रेन युद्ध का प्रभाव और नई रणनीति
US Army अपनी युद्ध नीति को यूक्रेन की जमीनी हकीकत के अनुसार ढाल रही है। जर्मनी में हुई 'Saber Junction' जैसी एक्सरसाइज में इन्फेंट्री यूनिट्स को इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और फ्रंट लाइन पर ड्रोन तैनात करने की खास ट्रेनिंग दी गई। यहाँ अमेरिकी सैनिकों ने यूक्रेनी सहयोगियों के साथ मिलकर यह सीखा कि हाई-इंटेंसिटी युद्ध में बिना पायलट वाले सिस्टम का इस्तेमाल कैसे प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
ड्रोन बटालियन का भविष्य
सबसे बड़ी बहस का केंद्र 3rd Battalion, 504th Parachute Infantry Regiment है। इस यूनिट को पहले खास तौर पर 'ड्रोन बटालियन' के रूप में तैयार किया गया था, जिसे अब वापस पारंपरिक एयरबोर्न इंफेंट्री में बदल दिया गया है। चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर Alex Miller का तर्क है कि वे सेना में कोई अलग 'ड्रोन कॉर्प्स' नहीं बनाना चाहते, बल्कि हर इन्फेंट्री यूनिट को ड्रोन के इस्तेमाल में एक्सपर्ट बनाना चाहते हैं। हालाँकि, लॉ मेकर्स इस विकेंद्रीकरण (decentralization) को लेकर चिंतित हैं कि कहीं इससे मिलिट्री मॉडर्नाइजेशन की रफ्तार धीमी न पड़ जाए।
नेतृत्व में फेरबदल और अनिश्चितता
यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब आर्मी के शीर्ष नेतृत्व में उठापटक जारी है। आर्मी सेक्रेटरी Dan Driscoll के इस्तीफे के बाद Adam Telle को कार्यवाहक सचिव नियुक्त किया गया है। डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth के कार्यकाल में हो रहे इन बदलावों से विश्लेषक चिंतित हैं कि क्या यह उथल-पुथल लंबी अवधि की रक्षा योजनाओं को प्रभावित करेगी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
डिफेंस सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है। मुख्य मुद्दा यह है कि क्या सेना का 'विकेंद्रीकृत' मॉडल सफल होगा या फिर समर्पित ड्रोन यूनिट्स की कमी से आधुनिकीकरण पर असर पड़ेगा। आने वाले समय में सेना के बजट आवंटन और नई तकनीकों की खरीद (procurement) की टाइमलाइन पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि नेतृत्व में अस्थिरता का असर सीधे रक्षा ठेकों और कंपनियों के काम पर पड़ सकता है।
