अमेरिकी सेना ने हाल ही में 'Operation Dragon Covenant Phase II' के तहत सामूहिक दफन (mass burial) की ड्रिल की है। कोरियन वॉर के बाद पहली बार हुई यह एक्सरसाइज बड़े स्तर पर होने वाले युद्धों के लिए सेना की बदली हुई रणनीति को दर्शाती है, जिसका असर ग्लोबल मार्केट और डिफेंस स्टॉक्स पर दिख सकता है।
अमेरिकी सेना की यह कवायद सैन्य तैयारियों में एक बड़े बदलाव का संकेत है। नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में 3rd Corps Sustainment Command और 20th Engineer Brigade द्वारा की गई यह ड्रिल इराक और अफगानिस्तान युद्ध के दौरान अपनाई गई त्वरित स्वदेश वापसी नीति से बिल्कुल अलग है।
बड़े युद्ध के लिए नई तैयारी
इस ट्रेनिंग का मुख्य फोकस युद्ध के दौरान होने वाली बड़ी जनहानि को मैनेज करना है। यह बताता है कि अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान अब छोटी-मोटी मुठभेड़ों के बजाय बड़े और गहन पारंपरिक युद्धों (high-intensity conventional warfare) की तैयारी कर रहा है। ड्रिल के दौरान भारी उपकरणों के जरिए महज 75 मिनट में विशाल दफन स्थल तैयार करने की क्षमता का प्रदर्शन किया गया, जो युद्ध जैसी स्थितियों के लिए एक अनुशासित प्रोटोकॉल स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों के नजरिए से, इस तरह के मिलिट्री अभ्यास ग्लोबल भू-राजनीति (geopolitical environment) का आईना हैं। बड़े युद्ध की आशंका अक्सर ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता लाती है। इसके चलते ऊर्जा बाजार (energy markets) में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और निवेशक 'Safe Haven' माने जाने वाले एसेट्स जैसे सोना, अमेरिकी डॉलर और सरकारी बॉन्ड्स की ओर रुख कर सकते हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
दुनिया भर में रक्षा बजट बढ़ने का सिलसिला जारी है। भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए यह एक 'Atmanirbhar Bharat' के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। Hindustan Aeronautics और Bharat Electronics जैसी कंपनियों के मजबूत ऑर्डर बुक इसी ट्रेंड को सपोर्ट करते हैं। हालांकि, ग्लोबल अनिश्चितता के कारण कच्चे माल की महंगाई और FII सेंटिमेंट में गिरावट का जोखिम भी बना हुआ है।
निवेशकों को अब ग्लोबल डिफेंस स्पेंडिंग ट्रेंड्स और एनर्जी कमोडिटी की कीमतों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि यह स्थिति केवल मिलिट्री लॉजिस्टिक्स तक सीमित नहीं, बल्कि ग्लोबल इंडस्ट्रियल सेक्टर की बदलती तस्वीर है।
