UK ने एक अमेरिकी टॉरपीडो को ऑटोनॉमस ड्रोन के जरिए फायर करके इतिहास रच दिया है। AUKUS डिफेंस एलायंस के तहत हुआ यह सफल परीक्षण भविष्य की समुद्री जंग की नई तस्वीर पेश कर रहा है, जो डिफेंस सेक्टर में बड़े बदलावों का संकेत है।
ब्रिटेन ने सैन्य तकनीक में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पहली बार 12-मीटर के 'एक्सालिबर' (Excalibur) ऑटोनॉमस अंडरसी ड्रोन से एक भारी-भरकम एंटी-सबमरीन टॉरपीडो को लॉन्च किया गया। यह परीक्षण किसी इंसानी पनडुब्बी के बजाय पूरी तरह से अनमैन्ड सिस्टम से हुआ, जो AUKUS एलायंस की भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा है।
डिफेंस सेक्टर में ऑटोनॉमस लहर
यह सफलता डिफेंस इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है। अब दुनिया भर की सेनाएं अपनी समुद्री ताकत बढ़ाने के लिए AUVs (ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स) और USVs (अनमैन्ड सरफेस वेसल्स) पर दांव लगा रही हैं। भारतीय डिफेंस बाजार के नजरिए से भी यह खबर अहम है, क्योंकि 'मेक इन इंडिया' के तहत ड्रोन और मरीन इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए भविष्य में कई बड़े सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के द्वार खुल सकते हैं।
AI और कूटनीति का नया संगम
न्यू यॉर्क में हुई उच्च-स्तरीय बैठकों में पीएम Andy Burnham और प्रेसिडेंट Donald Trump ने सिक्योरिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एक साथ लाने पर जोर दिया है। इसका सीधा असर भविष्य के सरकारी प्रोक्योरमेंट पर पड़ेगा, जहां AI-ड्रिवन सॉफ्टवेयर और साइबर सिक्योरिटी कंपनियों की डिमांड तेजी से बढ़ेगी।
क्या है निवेश का नजरिया?
दिसंबर में मियामी में होने वाले G20 समिट के बाद ब्रिटेन इसकी अध्यक्षता संभालेगा। इन डिप्लोमैटिक मुलाकातों का असर सीधा डिफेंस बजट पर पड़ता है। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि ये अंतरराष्ट्रीय रिसर्च एग्रीमेंट्स कितनी जल्दी बड़े कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट्स में बदलते हैं, जो डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के लिए मुनाफे का नया जरिया बन सकते हैं।
