यूके और यूक्रेन के बीच हुए नए डिफेंस समझौते के तहत ब्रिटेन को यूक्रेन की 'Avengers AI Labs' का एक्सेस मिल गया है। इस प्लेटफॉर्म पर **50 लाख** से ज्यादा कॉम्बैट इमेज मौजूद हैं, जो ब्रिटिश कंपनियों को ड्रोन और AI-आधारित सैन्य हार्डवेयर बनाने में मदद करेंगी।
यह समझौता रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत है। 'Avengers AI Labs' यूक्रेन का एक ऐसा डेटा सेंटर है, जहां सीधे युद्धक्षेत्र से जानकारी जुटाई जाती है। हर महीने 1 लाख से अधिक ड्रोन वीडियो स्ट्रीम और लाखों तस्वीरों के जरिए AI को दुश्मन के टैंक, आर्टिलरी और गोला-बारूद की सटीक पहचान करना सिखाया जा रहा है।
असली जंग के मैदान से डेटा का फायदा
आमतौर पर सैन्य सिमुलेशन में युद्ध की जटिलताओं को पूरी तरह से पकड़ना मुश्किल होता है, लेकिन यहां का डेटा इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और खराब मौसम जैसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों से लैस है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस डेटा पर ट्रेन किए गए AI मॉडल वर्तमान में 70% सटीकता के साथ रियल-टाइम में लक्ष्यों की पहचान कर रहे हैं। यह क्षमता दुनिया के किसी भी लैब में दोहराना लगभग असंभव है।
हार्डवेयर और ड्रोन तकनीक में निवेश
इस पार्टनरशिप में सॉफ्टवेयर के अलावा हार्डवेयर का भी बड़ा रोल है। Sintela, Mind Foundry और Skyral जैसी ब्रिटिश कंपनियां अब ऐसे कम-पावर वाले कंप्यूटर चिप्स विकसित करने पर काम कर रही हैं, जो ड्रोन के अंदर ही जटिल AI एल्गोरिदम चला सकें। यह तकनीक उन स्थितियों में बेहद कारगर होगी जब इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के कारण संचार लिंक टूट जाते हैं। साथ ही, SCALP/Storm Shadow मिसाइलों के कंपोनेंट्स का स्थानीय उत्पादन बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है।
रिस्क और एथिकल चिंताएं
इतनी संवेदनशील जानकारी साझा करने के अपने जोखिम भी हैं। यदि ये डेटासेट या AI मॉडल हैक हो जाते हैं, तो इससे पश्चिमी रक्षा रणनीतियों की गोपनीयता खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा, स्वायत्त घातक हथियारों के तेजी से विकास को लेकर नैतिक सवाल भी उठ रहे हैं। फिलहाल, ग्लोबल डिफेंस सेक्टर के निवेशक इस डेटा-संचालित तकनीक के भविष्य को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि यह आने वाले समय में सैन्य हार्डवेयर निर्माण की दिशा बदलने वाला है।
