Trump का बड़ा फैसला: अमेरिकी नौसेना अब पुराने स्टीम कैटापल्ट्स का करेगी इस्तेमाल, अरबों का लग सकता है झटका

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AuthorNeha Patil|Published at:
Trump का बड़ा फैसला: अमेरिकी नौसेना अब पुराने स्टीम कैटापल्ट्स का करेगी इस्तेमाल, अरबों का लग सकता है झटका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिकी नौसेना (US Navy) को भविष्य के निमित्ज़-क्लास (Ford-class) एयरक्राफ्ट कैरियर पर एडवांस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉन्च सिस्टम (EMALS) की जगह पुराने स्टीम कैटापल्ट्स का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। यह बदलाव USS Doris Miller से शुरू होगा, जो पहले से ही आधे से ज़्यादा बन चुका है। इस फैसले से अरबों डॉलर का अतिरिक्त खर्च और निर्माण में देरी का खतरा मंडरा रहा है।

क्या है यह बड़ा बदलाव?

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक निर्देश जारी किया है जिसमें अमेरिकी नौसेना को यह साफ कहा गया है कि भविष्य के फोर्ड-क्लास (Ford-class) एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS) को छोड़कर पारंपरिक स्टीम-पावर्ड कैटापल्ट्स और हाइड्रोलिक वेपन्स एलिवेटर का इस्तेमाल किया जाए। इस आदेश के तहत 60 दिनों के अंदर एक ट्रांजिशन प्लान पेश करना होगा। यह अमेरिकी नौसैनिक तकनीक की नीति में एक बड़ा उलटफेर है।

USS Doris Miller पर सीधा असर

यह निर्देश खास तौर पर USS Doris Miller (CVN-81) पर लागू होगा, जो कि फोर्ड-क्लास का चौथा जहाज है। हालांकि, USS Gerald R. Ford, USS John F. Kennedy, और USS Enterprise पर इस फैसले का असर नहीं बताया जा रहा है। लेकिन, USS Doris Miller के निर्माण में पहले से ही लगभग 50% काम हो चुका है, जिससे इस बदलाव को लागू करने में गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। EMALS सिस्टम के निर्माता General Atomics ने चेतावनी दी है कि इस बदलाव से इंटीग्रेशन (integration) में बड़े जोखिम, निर्माण में देरी और लागत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

आर्थिक और ऑपरेशनल चुनौतियाँ

स्टीम कैटापल्ट तकनीक पर वापस जाने का मतलब सिर्फ लॉन्च मैकेनिज्म बदलना नहीं है, बल्कि जहाज के पावर और इंटरनल सिस्टम्स का एक बड़ा रीडिज़ाइन (redesign) भी शामिल है। ऐतिहासिक रूप से, स्टीम सिस्टम्स को चलाने के लिए ज़्यादा क्रू की ज़रूरत पड़ती है और उनमें मेंटेनेंस का खर्च भी ज़्यादा आता है, जबकि EMALS सिस्टम को कम कर्मचारियों और कम मेंटेनेंस के लिए ही डिज़ाइन किया गया था। ऐसे में, नौसेना के लिए मैनपावर की कमी को दूर करने के प्रयास और मुश्किल हो सकते हैं, क्योंकि पुराने सिस्टम्स को ऑपरेट करने के लिए ज़्यादा नौसैनिकों की आवश्यकता होगी।

रक्षा विश्लेषकों और निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता अरबों डॉलर की लागत वृद्धि की है। जिस जहाज का 50% से ज़्यादा निर्माण हो चुका है, उसके डिज़ाइन में बदलाव के लिए मुख्य जहाज निर्माताओं, जैसे कि फोर्ड-क्लास कैरियर बनाने वाली Huntington Ingalls Industries, के साथ बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स पर फिर से बातचीत करनी पड़ेगी। इन बदलावों से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ेगी और डिलीवरी का समय भी लंबा खिंच जाएगा, जिससे रक्षा बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

तकनीकी विचलन

यह कदम अमेरिकी नौसेना को वैश्विक नौसैनिक उड्डयन के रुझानों से भी अलग कर देता है। जहाँ अमेरिका पुरानी स्टीम तकनीक की ओर बढ़ रहा है, वहीं चीन और फ्रांस जैसे प्रमुख वैश्विक नौसैनिक देश अपने नए एयरक्राफ्ट कैरियर में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट तकनीक को अपना रहे हैं। यह तकनीकी विचलन अमेरिकी कैरियर क्षमताओं की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर सवाल खड़े कर सकता है।

अब सभी की नज़र पेंटागन के 60-दिवसीय समय-सीमा पर जवाब पर होगी। ट्रांजिशन प्लान में अपेक्षित बजट प्रभाव, निर्माण समय-सीमा में बदलाव और चुंबकीय प्रणोदन (magnetic propulsion) के लिए इंजीनियर किए गए डिज़ाइन को रेट्रोफिट (retrofit) करने की व्यवहार्यता का विवरण होने की संभावना है। निवेशक और विश्लेषक वित्तीय नुकसान के पूर्ण पैमाने और बेड़े पर दीर्घकालिक परिचालन प्रभावों का आकलन करने के लिए इन विवरणों की बारीकी से निगरानी करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.