Tata Boeing Aerospace Limited (TBAL) ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। हैदराबाद स्थित फैसिलिटी से कंपनी ने 400वीं AH-64E Apache अटैक हेलीकॉप्टर फ्यूजलेज डिलीवर कर दी है। हालांकि, डिफेंस सेक्टर के इस विस्तार के बीच निवेशक कंपनी के बढ़ते कैपिटल खर्च और ऑपरेशनल रिस्क पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का नया हब
हैदराबाद की यह 52,000 वर्ग मीटर में फैली फैसिलिटी अब ग्लोबल डिफेंस सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। 750 से ज्यादा कर्मचारियों वाली इस यूनिट से अब तक 19 देशों की सेनाओं के लिए पुर्जे भेजे जा चुके हैं। इस प्लांट की सफलता यह दर्शाती है कि कैसे बड़े डिफेंस प्लेयर्स अब अपना मैन्युफैक्चरिंग बेस भारत जैसे देशों में शिफ्ट कर रहे हैं।
मिसाइल मार्केट में भी बड़ी एंट्री
Apache की सफलता के बाद, Tata Advanced Systems ने अब Javelin मिसाइलों के को-प्रोडक्शन के लिए Raytheon और Lockheed Martin के साथ हाथ मिलाया है। यह स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप कंपनी को इंडो-पैसिफिक डिफेंस मार्केट में और मजबूत स्थिति में लाएगी।
निवेशकों के लिए जोखिम और चुनौतियां
कंपनी का यह कारोबार काफी ज्यादा कैपिटल-इंटेंसिव है। बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए कर्ज का सहारा लेना पड़ता है, जिसका असर पैरेंट कंपनियों के लेवरेज रेशियो और रिटर्न पर पड़ सकता है। इसके अलावा, डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स में 'फिक्स्ड-प्राइस' मॉडल होने के कारण रॉ मटेरियल की कीमतों में बदलाव और सप्लाई चेन में देरी सीधे प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। मार्केट अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि कंपनी नए प्रोजेक्ट्स और कर्ज के बीच कैसे संतुलन बिठाती है।
