Tata Advanced Systems और Nibe Defence को ₹1,600 करोड़ का आर्मी ड्रोन ऑर्डर मिला

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AuthorMehul Desai|Published at:
Tata Advanced Systems और Nibe Defence को ₹1,600 करोड़ का आर्मी ड्रोन ऑर्डर मिला

भारतीय सेना ने Tata Advanced Systems और Nibe Defence को ₹1,600 करोड़ के 840 लोइटेरिंग म्यूनिशन (Loitering Munitions) सप्लाई करने के लिए चुना है। Tata Advanced Systems को ₹1,000 करोड़ का हिस्सा मिलेगा, जबकि Nibe Defence ₹600 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट संभालेगी। यह ऑर्डर सेना की तोपखानों को मॉडर्न स्ट्राइक क्षमताओं से लैस करने की मुहिम का हिस्सा है।

सेना को मिलेंगी नई स्ट्राइक ताकतें

भारतीय सेना अपनी स्ट्राइक क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है। सेना ने Tata Advanced Systems (TASL) और Nibe Defence को 840 लोइटेरिंग म्यूनिशन (Loitering Munitions) सप्लाई करने के लिए चुना है। ये ऐसे सिस्टम हैं जो किसी टारगेट एरिया पर मंडराने के बाद उस पर हमला कर सकते हैं। इस पूरे सौदे की कीमत लगभग ₹1,600 करोड़ है। Tata Advanced Systems ने इस कॉन्ट्रैक्ट का बड़ा हिस्सा, यानी ₹1,000 करोड़ का काम अपने नाम किया है, वहीं Nibe Defence बाकी के ₹600 करोड़ की यूनिट्स सप्लाई करेगी।

रणनीतिक आधुनिकीकरण और ऑर्डर की जानकारी

यह खरीद एक कॉम्पिटिटिव बिडिंग प्रक्रिया के बाद हुई है, जिसमें Tata Advanced Systems और Nibe Defence टेक्निकल इवैल्यूएशन में सफल रहीं। इन म्यूनिशन्स को 100 किलोमीटर तक की रेंज में टारगेट को हिट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह खरीद भारतीय सेना के तोपखानों को मॉडर्न बनाने के बड़े प्लान का हिस्सा है। सेना खासतौर पर Shaktibaan और Bhairav बटालियन जैसी यूनिट्स में खास ड्रोन क्षमताओं को इंटीग्रेट कर रही है, ताकि भविष्य के युद्ध परिदृश्यों में टोही (reconnaissance) और प्रिसिजन स्ट्राइक ऑपरेशंस को बेहतर बनाया जा सके।

डिफेंस में ड्रोन क्षमताओं का विस्तार

सेना की योजना काफी महत्वाकांक्षी है। आर्टिलरी डायरेक्टोरेट का लक्ष्य अगले 12 से 18 महीनों में 50 किलोमीटर से लेकर 1,000 किलोमीटर तक की ऑपरेशनल रेंज वाले विभिन्न प्रकार के ड्रोन को शामिल करना है। इस खास ऑर्डर के अलावा, सेना 36 जेट-बेस्ड ड्रोन के लिए एक अलग टेंडर भी निकालने की तैयारी में है, जिसकी कीमत लगभग ₹1,500 करोड़ होने की उम्मीद है। इन खरीदों का यह सिलसिला सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को दर्शाता है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए

निवेशकों के लिए, इन हाई-वैल्यू डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स के एग्जीक्यूशन (execution) पर नज़र रखना सबसे अहम होगा। ऑर्डर जीतना रेवेन्यू ग्रोथ के लिए एक पॉजिटिव कदम है, लेकिन प्रॉफिट मार्जिन पर असली असर कंपनियों की कॉस्ट मैनेजमेंट, कंपोनेंट्स की एफिशिएंट सोर्सिंग और डिलीवरी टाइमलाइन्स को पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। जैसे-जैसे दोनों कंपनियां इन जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी क्षमताएं बढ़ाएंगी, क्वालिटी स्टैंडर्ड्स बनाए रखना और कैपिटल स्पेंडिंग मैनेज करना महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, शेयरधारकों को ऑर्डर एग्जीक्यूशन की स्थिति और जेट-बेस्ड ड्रोन व अन्य लॉन्ग-रेंज सिस्टम्स के लिए सेना की पाइपलाइन से भविष्य में कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की उनकी क्षमता पर अपडेट्स देखने चाहिए।

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