Tata Advanced Systems: Javelin मिसाइल डील से रक्षा क्षेत्र में बड़ी हलचल, अब भारत में होगी मैन्युफैक्चरिंग

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Tata Advanced Systems: Javelin मिसाइल डील से रक्षा क्षेत्र में बड़ी हलचल, अब भारत में होगी मैन्युफैक्चरिंग

Tata Advanced Systems (TASL) ने Javelin एंटी-टैंक मिसाइलों के स्थानीय असेंबली के लिए एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। भारतीय सेना के **₹292 करोड़** के इमरजेंसी ऑर्डर के बाद यह कदम देश की डिफेंस कैपेबिलिटी को नई ऊंचाई देगा।

डिफेंस सेक्टर में बड़ा बदलाव

भारत के रक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हुई है। Tata Advanced Systems Limited (TASL) ने अब Lockheed Martin और Raytheon के Javelin Joint Venture के साथ हाथ मिलाया है। 31 अगस्त 2026 को हुए इस एग्रीमेंट के बाद, अब भारत में Javelin मिसाइल सिस्टम के प्रोडक्शन की राह आसान हो गई है। हाल ही में भारतीय सेना ने ₹292 करोड़ के इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट ऑर्डर को मंजूरी दी है, जिसके बाद से इस डील पर सबकी नजरें हैं।

कैसे होगा कामकाज?

रणनीति साफ है—इंपोर्ट पर निर्भरता कम करना। अब मिसाइल के मुख्य हिस्से अमेरिका की अलाबामा और एरिजोना फैसिलिटी में बनेंगे, लेकिन उनकी फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन का काम भारत में TASL की यूनिट्स में होगा। यह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भारतीय डिफेंस इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

निवेश और रिस्क का गणित

टाटा सन्स की सब्सिडियरी होने के नाते TASL को मजबूत सपोर्ट तो है, लेकिन डिफेंस सेक्टर का कारोबार काफी 'कैपिटल इंटेंसिव' होता है। कंपनी फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए करीब ₹1,200 करोड़ का कैपेक्स (Capex) प्लान कर रही है।

निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कंपनी का नेट डेट-टू-EBITDA रेशियो पिछले फाइनेंशियल ईयर में 4.2 गुना दर्ज किया गया था। भविष्य में कंपनी की परफॉर्मेंस इस बात पर निर्भर करेगी कि वह DRDO के MPATGM जैसे स्वदेशी विकल्पों के मुकाबले खुद को कैसे खड़ा करती है और इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी लागत को कैसे बैलेंस करती है। फिलहाल, असेंबली फैसिलिटी का समय और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की गति ही इस शेयर के लिए अगले बड़े 'ट्रिगर' होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.