Taiwan ने अपनी डिफेंस कैपेबिलिटी को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार 2030 तक डिफेंस बजट को जीडीपी का **5%** करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, ताकि विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता कम की जा सके और Cheetah जैसे स्वदेशी हथियारों का निर्माण बढ़ाया जा सके।
स्वदेशी डिफेंस का नया सफर
Taiwan अब बाहरी देशों से हथियार खरीदने के बजाय अपनी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को आत्मनिर्भर बनाने पर तेजी से काम कर रहा है। हालांकि, अमेरिका के साथ सप्लाई को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन सरकार का फोकस अब एक ऐसी सॉवरेन डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर है जो अपनी सुरक्षा की जरूरतों को खुद पूरा कर सके।
बड़े वित्तीय लक्ष्य (Fiscal Targets)
सरकार ने इस बदलाव के लिए काफी आक्रामक वित्तीय योजना तैयार की है। डिफेंस स्पेंडिंग को 2027 तक जीडीपी के 3% से ऊपर ले जाने का अनुमान है, और 2030 तक इसे 5% तक पहुंचाने का लंबा लक्ष्य रखा गया है। यह बड़ा बदलाव मार्केट में एक नई हलचल पैदा कर रहा है।
'Cheetah' की दमदार एंट्री
इस स्वदेशी आत्मनिर्भरता की रणनीति में Cheetah का सफल परीक्षण एक बड़ा माइलस्टोन है। यह आठ पहियों वाला आर्मर्ड व्हीकल है, जिसमें 105-mm की तोप लगी है। इसे हर तरह के रास्तों और शहरी इलाकों में बेहतर मोबिलिटी के लिए डिजाइन किया गया है, जो स्थानीय डिफेंस इंडस्ट्री की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दिखाता है।
निवेशकों के लिए सबक
यह ट्रेंड केवल Taiwan तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे मिशन की तरह ही ग्लोबल लेवल पर डिफेंस इंडिजनाइजेशन (Indigenization) का हिस्सा है। हालांकि, भारी मैन्युफैक्चरिंग की इस होड़ में कई रिस्क भी हैं। 5% जीडीपी बजट का मतलब है सरकारी खजाने पर दबाव, और इतने बड़े स्तर पर प्रोडक्शन करने में तकनीकी देरी या कॉस्ट ओवररन जैसे जोखिमों से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब देखने वाली बात यह होगी कि स्थानीय कंपनियां प्रोटोटाइप से मास प्रोडक्शन तक कितनी जल्दी पहुंचती हैं और यह रणनीति विदेशी सप्लायर्स के साथ प्रोक्योरमेंट के तालमेल को कैसे प्रभावित करती है।
