सिंगापुर सरकार ने साफ कर दिया है कि वह Air India में Singapore Airlines के निवेश फैसलों में कोई दखल नहीं देगी। एयर इंडिया को रीस्ट्रक्चरिंग के लिए **₹100 अरब** की पूंजी की जरूरत है, जिसे अब पूरी तरह से बिजनेस लॉजिक पर तय किया जाएगा।
निवेश पर सरकार का 'हैंड्स-ऑफ' एप्रोच
सिंगापुर सरकार ने स्पष्ट किया है कि Air India में Singapore Airlines के निवेश का फैसला पूरी तरह से कमर्शियल आधार पर होगा। एयर इंडिया फिलहाल अपनी रीस्ट्रक्चरिंग और फ्लीट मॉडर्नाइजेशन के लिए $1.1 अरब यानी करीब ₹100 अरब की नई फंडिंग जुटाने की कोशिश में है। सरकार के इस स्टैंड का मतलब है कि अब मैनेजमेंट का पूरा फोकस केवल फाइनेंशियल अनुशासन और बाजार आधारित रिटर्न पर होगा।
टाटा संस और पार्टनरशिप का गणित
Air India में बहुमत हिस्सेदारी टाटा संस के पास है। एयरलाइन की शेयरहोल्डिंग का गणित कुछ ऐसा है:
- Tata Sons: लगभग 75% हिस्सेदारी
- Singapore Airlines: शेष हिस्सेदारी
नई फंडिंग को किस्तों (tranches) में जारी किए जाने की योजना है, जो एयरलाइन के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस माइलस्टोन से जुड़ी होगी। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करेगी कि पूंजी का सही इस्तेमाल हो।
चुनौतियां अभी बरकरार
फंडिंग की कवायद ऐसे समय में हो रही है जब एयरलाइन कई मोर्चों पर दबाव झेल रही है। बढ़ते फ्यूल कॉस्ट और मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के कारण ऑपरेशनल खर्च काफी बढ़ गया है। इसके अलावा, जून 2025 में हुए अहमदाबाद के पास फ्लाइट 171 (Boeing 787-8) के हादसे ने भी एयरलाइन की साख और टर्नअराउंड प्लान पर भारी दबाव डाला है।
पिछले फाइनेंशियल ईयर में एयरलाइन ने $2 अरब से ज्यादा का नुकसान दर्ज किया था। ऐसे में निवेशकों की नजर इस बात पर है कि एयरलाइन अपने परफॉर्मेंस माइलस्टोन को कितनी तेजी से पूरा करती है, क्योंकि इसी पर फंडिंग की अगली किश्त निर्भर करेगी।
