हैदराबाद स्थित Sigma Advanced Systems ने उत्तरी अमेरिका की एक फर्म के साथ **₹174 करोड़** का करार किया है। कंपनी **155 mm** आर्टिलरी सबसिस्टम की सप्लाई करेगी, जो NATO डिफेंस सप्लाई चेन का हिस्सा होगा।
ग्लोबल मार्केट में बढ़ता दबदबा
हैदराबाद की डिफेंस मैन्युफैक्चरर Sigma Advanced Systems ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पैठ मजबूत कर ली है। यह कॉन्ट्रैक्ट करीब $1.97 करोड़ (लगभग ₹174 करोड़) का है। इसके तहत कंपनी 155 mm आर्टिलरी शेल के अहम पार्ट्स बनाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट को 2027 की दूसरी तिमाही तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कॉम्प्लेक्स मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ा कदम
मई 2026 के बाद से कंपनी का यह पांचवां बड़ा प्रोजेक्ट है। कंपनी अब केवल साधारण कंपोनेंट सप्लायर नहीं, बल्कि एक इंजीनियरिंग पार्टनर के रूप में उभर रही है। अब वे शेल बॉडी, फिल्ड फ्यूज और बेस-ब्लीड तकनीक जैसे एडवांस कंपोनेंट्स पर फोकस कर रहे हैं।
डिफेंस डिमांड का मिल रहा फायदा
दुनियाभर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के चलते NATO देशों के स्टॉक घट गए हैं। वे अब अपनी इन्वेंट्री भरने के लिए सुरक्षित और हाई-क्वालिटी मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर ढूंढ रहे हैं। भारतीय कंपनियों के लिए यह एक बड़ा अवसर है क्योंकि वे वैश्विक मानकों पर खरा उतर रही हैं।
क्या हैं रिस्क फैक्टर?
इन्वेस्टर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में सप्लाई चेन और सरकारी नियमों का पालन बहुत सख्त होता है। कच्चा माल मिलने में देरी या अंतरराष्ट्रीय नीतियों में बदलाव कंपनी के ऑर्डर्स और मार्जिन पर असर डाल सकते हैं। फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या कंपनी 2027 की डेडलाइन तक काम पूरा कर पाती है या नहीं।
