सबमरीन डील ने शिपबिल्डिंग सेक्टर में लगाई आग
शुक्रवार, 6 मार्च, 2026 को शेयर बाजार में भले ही BSE Sensex में हल्की गिरावट दिखी हो, लेकिन सरकारी जहाज बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में गजब की तेजी देखने को मिली। Mazagon Dock Shipbuilders (MDL) इस रेस में सबसे आगे रहा, जिसके शेयर 9% से ज्यादा उछलकर ₹2,559 पर पहुंच गए। इस शानदार परफॉरमेंस की वजह MDL का सरकार के साथ P-75 (India) प्रोजेक्ट के तहत छह स्टील्थ कन्वेंशनल सबमरीन (Air-Independent Propulsion सिस्टम वाली) बनाने के लिए ₹99,000 करोड़ के सौदे पर मोलभाव पूरा होने की पुष्टि करना है। अब बस इस डील को सरकारी मंजूरी का इंतजार है। यह MDL के इतिहास का सबसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट साबित हो सकता है, जिससे कंपनी अपने घटते ऑर्डर बुक को सहारा दे सकेगी, जो दिसंबर 2025 में ₹23,758 करोड़ था (FY21 के आखिर में यह ₹49,700 करोड़ था)। हालांकि, इस बड़े ऑर्डर से कंपनी को रेवेन्यू का फायदा असल में FY28 से मिलना शुरू होगा, जब प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा।
सेक्टर में उत्साह और वैल्यूएशन पर सवाल
इस खबर का असर अन्य कंपनियों पर भी दिखा। Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) के शेयर 6% और Cochin Shipyard (CSL) के शेयर 5% तक चढ़ गए। पिछले दो ट्रेडिंग दिनों में ये शेयर पहले ही 10% तक बढ़ चुके थे। ब्रोकरेज फर्म Antique Stock Broking का मानना है कि नौसेना जहाज निर्माण सेक्टर के लिए यह एक अच्छा संकेत है। उन्होंने Cochin Shipyard की रेटिंग को 'Sell' से बढ़ाकर 'Hold' कर दिया है। इसके पीछे भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड की महत्वाकांक्षी बेड़ा विस्तार योजनाओं को कारण बताया गया है, जिनके तहत दोनों लगभग 200 जहाज खरीदने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा, कमर्शियल शिपबिल्डिंग में भी हर साल ₹120-150 अरब (billion) तक के अवसर देखे जा रहे हैं।
इन सबके बावजूद, बाजार इन कंपनियों के मौजूदा वैल्यूएशन पर भी गौर कर रहा है। MDL फिलहाल करीब 39.4x के P/E पर ट्रेड कर रहा है, जिसकी मार्केट कैप लगभग ₹94,895 करोड़ है। GRSE का P/E करीब 40.1x और मार्केट कैप ₹27,597 करोड़ है, जो इंडस्ट्री के औसत P/E 53.1x से बेहतर है। वहीं, Cochin Shipyard का P/E लगभग 55.9x और मार्केट कैप करीब ₹39,725 करोड़ है, जो इसके हालिया 52-हफ्ते के निचले स्तर ₹1,223 से ऊपर चल रहा है।
फायदे में देरी और चिंताएं
हालांकि सबमरीन का यह बड़ा ऑर्डर एक बड़ा ट्रिगर है, लेकिन कुछ जोखिम भी हैं जो अनियंत्रित उत्साह को कम कर सकते हैं। प्रोजेक्ट को पूरा होने में लंबा समय लगेगा, और रेवेन्यू का असर FY28 से ही दिखेगा। ऐसे में, शेयरों की मौजूदा तेजी का निकट भविष्य के फाइनेंशियल परफॉरमेंस से सीधा मेल न होना संभव है। MDL की ऑर्डर बुक में आई गिरावट चिंता का विषय रही है, और सरकारी रक्षा कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भरता नीति या बजट में बदलाव के जोखिम को बढ़ाती है।
विश्लेषकों की राय भी बंटी हुई है। उदाहरण के लिए, ICICI Securities ने MDL पर 'SELL' की सलाह दी है और टारगेट प्राइस ₹600 रखा है, जो मौजूदा भाव से काफी कम है। Cochin Shipyard को Antique Stock Broking ने 'Hold' किया है, लेकिन यह शेयर ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस ₹1,471 से ऊपर ट्रेड कर रहा है। GRSE, जो कर्ज-मुक्त है और मजबूत मुनाफा दिखा रहा है, वह भी अपने ऊंचे वैल्यूएशन मल्टीपल्स और पिछले साल 85% से ज्यादा की तेजी के बाद बाजार में करेक्शन के जोखिम का सामना कर सकता है।
भविष्य की राह और जानकारों का मत
लंबे समय को देखें तो भारत के जहाज निर्माण सेक्टर का भविष्य उज्ज्वल नजर आ रहा है। 'मेक इन इंडिया' जैसी सरकारी पहलें और रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण से इसे बढ़ावा मिलेगा। Cochin Shipyard, KSOE के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी के चलते डिफेंस और कमर्शियल दोनों तरह के शिपबिल्डिंग में अच्छा कर सकता है। GRSE को जल्द ही 'नवरत्न' (Navratna) स्टेटस मिलने की उम्मीद है, जिससे उसकी वित्तीय और परिचालन क्षमताएं बढ़ सकती हैं।
मौजूदा वैल्यूएशन के बावजूद, जानकारों को लगातार ग्रोथ की उम्मीद है। Cochin Shipyard के लिए ब्रोकरेज टारगेट का औसत 1-साल का अनुमान ₹1,455.54 है (हालांकि शेयर अभी करीब ₹1,510 पर है)। GRSE को भी कई एनालिस्ट्स ने 'BUY' रेटिंग दी है। सेक्टर की रफ्तार इस बात पर निर्भर करेगी कि लगातार बड़े रक्षा ऑर्डर आते रहें और कंपनियां कमर्शियल व स्पेशलाइज्ड शिपिंग में सफलतापूर्वक विस्तार करें।
