Sarvam AI ने भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को इंटीग्रेट करने के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ करार किया है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम कर देश में ही एक सुरक्षित AI इकोसिस्टम तैयार करना है।
भारतीय रक्षा मंत्रालय ने अब सेना की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए Sarvam AI के साथ एक रणनीतिक समझौता किया है। इस साझेदारी के तहत थल सेना, नौसेना और वायु सेना के ऑपरेशन्स को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक AI टूल्स का उपयोग किया जाएगा। इसका मुख्य फोकस टारगेट एक्विजिशन (Target Acquisition) और बेहतर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है, जिसे Headquarters Integrated Defence Staff द्वारा समन्वित किया जाएगा।
सुरक्षा के लिए खास डिविजन 'चाणक्य'
रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को ध्यान में रखते हुए, Sarvam AI ने एक खास सुरक्षित डिविजन बनाया है, जिसका नाम 'चाणक्य' (Chanakya) रखा गया है। यह डिविजन राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों के हिसाब से कड़े प्रोटोकॉल और फायरवॉल के साथ काम करेगा। इसमें 'Sarvam 105B' फाउंडेशन मॉडल का उपयोग किया जा रहा है ताकि तीनों सेनाओं के लिए एक यूनिफाइड डेटा इकोसिस्टम तैयार किया जा सके।
'आत्मानिर्भर भारत' और निवेश के मौके
सरकार का यह कदम 'आत्मानिर्भर भारत' के लक्ष्य को और मजबूत करता है। पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप्स और प्राइवेट टेक कंपनियों के लिए दरवाजे खुलने से मार्केट में नई संभावनाएं पैदा हुई हैं। जो कंपनियां हाई-सिक्योरिटी और हाई-परफॉर्मेंस मानकों पर खरी उतरेंगी, उनके लिए डिफेंस सेक्टर में विकास के बड़े रास्ते खुल रहे हैं।
जोखिम और चुनौतियां
हालांकि, रक्षा प्रणालियों में AI को जोड़ना चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए सख्त साइबर सुरक्षा मानकों का पालन, विविध वातावरण में टेस्टिंग और अलग-अलग मिलिट्री हार्डवेयर के साथ सॉफ्टवेयर को स्केल करना एक बड़ी चुनौती होगी। मंत्रालय ने साफ किया है कि AI केवल विश्लेषण की गति को तेज करेगा, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा इंसानी नियंत्रण (Human-in-the-loop) में ही रहेगा। निवेशकों की नजर अब इस प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट से लेकर इसकी सक्रिय तैनाती तक की समयसीमा पर टिकी है।
